दिल्ली में अब तक डेंगू के 212 और मलेरिया के 62 मामले दर्ज, जानें डेंगू होने पर तुरंत क्या करें और किन गलतियों से बचें

दिल्ली में अब तक डेंगू के 212 और मलेरिया के 62 मामले दर्ज, जानें डेंगू होने पर तुरंत क्या करें और किन गलतियों से बचें

विशेष रिपोर्टर, नई दिल्ली: मानसून की झमाझम बारिश और जगह-जगह जलभराव के बीच देश की राजधानी दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों (Vector-Borne Diseases) का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। दिल्ली नगर निगम (MCD) और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल राजधानी में डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बारिश के मौसम के दौरान जलजमाव वाले स्थानों पर मच्छरों का प्रजनन (Breeding) तेज होने से स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में अब तक डेंगू के 212 और मलेरिया के 62 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि चिकुनगुनिया के 14 मामले दर्ज किए गए हैं।

राजधानी के कई इलाकों, विशेष रूप से वेस्ट ज़ोन, सेंट्रल ज़ोन और सिविल लाइंस में मच्छरों का हमला सबसे अधिक देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसून चरम पर रहने के कारण डेंगू और मलेरिया का प्रकोप और ज्यादा फैल सकता है। ऐसे में नागरिकों को सतर्क रहने और शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत सही कदम उठाने की जरूरत है।

राजधानी में मच्छरों का हमला: दिल्ली में अब तक डेंगू और मलेरिया के कुल कितने आंकड़े?

दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा जारी वेक्टर-बोर्न डिजीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी से जुलाई के अंत तक राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू के कुल 212 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इन 212 मामलों में से अकेले MCD क्षेत्र से 194 मामले सामने आए हैं, जबकि शेष मामले एनडीएमसी (NDMC), दिल्ली कैंट और रेलवे क्षेत्रों से रिपोर्ट किए गए हैं।

इसके साथ ही, मलेरिया के 62 और चिकुनगुनिया के 14 मरीज अब तक अस्पताल पहुंचे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इस वर्ष अब तक डेंगू या मलेरिया के कारण किसी भी मरीज की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए एमसीडी के डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (DBC) की टीमों ने राजधानी भर में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चला रखा है। नगर निगम कर्मचारियों द्वारा लगभग 2 करोड़ घरों और परिसरों का दौरा किया गया है, जिसमें 50,000 से अधिक घरों में मच्छरों का लार्वा पाया गया। नियम उल्लंघन और जलभराव के लिए 47,000 से अधिक कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं और हजारों लोगों पर मौके पर ही जुर्माना (Spot Fine) लगाया गया है। नगर निगम ने पार्कों, नालियों और जलस्रोतों में लार्वा भक्षी गप्पी मछलियों (Gambusia fish) को भी छोड़ा है ताकि मच्छरों की संख्या पर अंकुश लगाया जा सके।

अगर हो जाए डेंगू तो क्या करें? जानें शुरुआती लक्षण और तुरंत अपनाए जाने वाले उपचार

डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो 'एडीज एजिप्टी' (Aedes aegypti) नाम के संक्रमित मादा मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर अक्सर दिन के समय काटता है। यदि किसी व्यक्ति को डेंगू हो जाता है, तो समय पर सही देखभाल और उपचार से मरीज बहुत जल्द स्वस्थ हो सकता है।

  1. शुरुआती लक्षणों की पहचान करें:

    • तेज बुखार (102°F से 104°F तक होना)

    • आंखों के पीछे तेज दर्द (Retro-orbital pain) होना

    • सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज ऐंठन व दर्द होना (इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहा जाता है)

    • त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes) या दाने निकलना

    • जी मिचलाना, उल्टी होना और अत्यधिक कमजोरी व थकान महसूस होना

  2. हाइड्रेशन सबसे ज्यादा जरूरी (पर्याप्त तरल पदार्थ लें):

    डेंगू के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बनाए रखना है। मरीज को नारियल पानी, ओआरएस (ORS) घोल, नींबू पानी, पतली छाछ, ताजे फलों का जूस और दाल का पानी लगातार देते रहें। इससे ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट्स कंट्रोल में रहते हैं।

  3. उचित विश्राम (Complete Bed Rest):

    डेंगू होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। इसलिए मरीज को कम से कम 7 से 10 दिनों तक पूरी तरह से आराम करना चाहिए और किसी भी तरह के शारीरिक परिश्रम से बचना चाहिए।

  4. प्लेटलेट काउंट (Platelet Count) की नियमित निगरानी करें:

    डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं। डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट कराएं और प्लेटलेट स्तर पर नजर रखें। हालांकि, जब तक प्लेटलेट्स बहुत ज्यादा न गिर जाएं या शरीर में ब्लीडिंग के लक्षण न दिखें, तब तक प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती।

  5. हल्का और सुपाच्य भोजन दें:

    मरीज के खान-पान में खिचड़ी, दलिया, उबली सब्जियां, सूप और पपीता जैसी सुपाच्य चीजें शामिल करें। पपीते के पत्ते का रस और गिलोय का काढ़ा भी प्लेटलेट्स रिकवरी में मददगार माना जाता है, लेकिन इसे डॉक्टर के परामर्श के बाद ही सीमित मात्रा में लें।

क्या न करें? इन जानलेवा गलतियों से बचकर दूर करें डेंगू का खतरा

डेंगू के इलाज में जितनी सावधानी इस बात की रखनी होती है कि क्या करना है, उतनी ही सावधानी इस बात में भी रखनी जरूरी है कि क्या बिल्कुल नहीं करना है। गलत दवाइयां लेने या लापरवाही बरतने से डेंगू साधारण स्थिति से गंभीर (Dengue Hemorrhagic Fever) रूप ले सकता है।

  1. पेनकिलर लेने से बचें (No Ibuprofen or Aspirin):

    डेंगू बुखार या शरीर दर्द होने पर कभी भी गलती से एस्पिरिन (Aspirin), इबूप्रोफेन (Ibuprofen) या कॉम्बिफ्लैम (Combiflam) जैसी दर्द निवारक दवाइयां (NSAIDs) न लें। ये दवाएं खून को पतला करती हैं और शरीर के अंदरूनी अंगों से रक्तस्राव (Internal Bleeding) के खतरे को बढ़ा सकती हैं। बुखार कम करने के लिए केवल पैरासिटामोल (Paracetamol) ही लें, वह भी डॉक्टर की सलाह से।

  2. बिना डॉक्टर के एंटीबायोटिक्स न खाएं:

    डेंगू एक वायरस जनित बीमारी (Viral Disease) है, इसलिए इसमें एंटीबायोटिक (Antibiotics) दवाएं बेअसर होती हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के खुद से दवाइयां (Self-Medication) बिल्कुल न लें।

  3. चेतावनी के संकेतों (Warning Signs) को नजरअंदाज न करें:

    यदि मरीज को लगातार उल्टियां हो रही हों, पेट में असहनीय दर्द हो, मसूड़ों या नाक से खून आ रहा हो, सांस लेने में तकलीफ हो या बहुत ज्यादा सुस्ती आ रही हो, तो इसे हल्के में न लें। यह डेंगू के गंभीर रूप का संकेत है। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं।

मच्छरों के आतंक से बचाव: MCD और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचना और अपने आसपास मच्छरों को पनपने न देना है:

  • पानी जमा न होने दें: अपने घर के आसपास, कूलर, गमलों, पुराने टायरों, पक्षियों के पीने के बर्तन और छतों पर कहीं भी पानी इकट्ठा न होने दें। सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर की सफाई कर उसे पूरी तरह सुखाएं।

  • मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें: सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और बाहर निकलते समय शरीर पर मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम या स्प्रे लगाएं।

  • पूरे कपड़े पहनें: दिन के समय पूरी बांह की कमीज, फुल पैंट और जुराबें पहनें ताकि शरीर का अधिकतम हिस्सा ढका रहे।

  • घर की खिड़कियों पर जाली लगाएं: शाम और सुबह के वक्त खिड़की-दरवाजे बंद रखें या जालियों का इस्तेमाल करें, क्योंकि इसी समय एडीज और एनोफिलीज़ मच्छर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।

राजधानी में बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। हालांकि, आम नागरिकों का सहयोग ही इस बीमारी को महामारी बनने से रोक सकता है। अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखकर और थोड़ी सी सतर्कता बरतकर आप अपने परिवार को डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।

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