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लापरवाही की तो बन सकता है कैंसर, डॉक्टर से जानिए रिवर्स करने का आसान तरीका

भारतीय समाज और खासकर शहरी इलाकों में एक ऐसी गंभीर बीमारी बहुत तेजी से अपने पैर पसार रही है, जिसे लोग अक्सर एक मामूली समस्या समझकर टाल देते हैं। हम बात कर रहे हैं फैटी लिवर (Fatty Liver Disease) की, जो आज के समय में एक साइलेंट किलर की तरह उभर रहा है। अक्सर लोग जब किसी दूसरी वजह से पेट का अल्ट्रासाउंड कराते हैं, तो रिपोर्ट में फैटी लिवर का जिक्र देखकर भी उसे नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि इसके शुरुआती चरण में शरीर में कोई खास या दर्दनाक लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन देश के जाने-माने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अब साफ चेतावनी दी है कि यह छोटी सी दिखने वाली लापरवाही भविष्य में आपको लिवर कैंसर जैसे बेहद खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर सकती है।

आखिर क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं मामले? खराब लाइफस्टाइल और तनाव हैं असली वजह

भारत में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या में अचानक आई इस बाढ़ के पीछे हमारी आधुनिक और बेहद सुस्त जीवनशैली को मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, प्रोसेस्ड और जंक फूड से भरा अनहेल्दी खानपान, दिनभर बिना किसी शारीरिक गतिविधि के बैठे रहना, रात को देर तक जागना यानी खराब नींद और अत्यधिक मानसिक तनाव इसके सबसे प्रमुख कारण हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट संकेत या आहट के चुपचाप शरीर के भीतर कई सालों तक पनपती रहती है और सीधे तब सामने आती है जब लिवर गंभीर रूप से डैमेज हो चुका होता है।

शुरुआती स्टेज में पूरी तरह ठीक हो सकता है लिवर, जानिए क्या कहते हैं बड़े डॉक्टर

मशहूर चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शलीन अग्रवाल ने इस बीमारी की गंभीरता और इसके इलाज पर बात करते हुए बताया कि फैटी लिवर उन गिनी-चुनी लिवर की बीमारियों में शामिल है, जिसे शुरुआती चरण में बिना किसी जटिल मेडिकल प्रोसीजर के काफी हद तक पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। दरअसल, जब हमारे लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट यानी वसा जमा होने लगती है, तो लिवर की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। हमारा लिवर शरीर के भीतर पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, खून से विषैले पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने और मेटाबॉलिज्म को सुचारू रूप से नियंत्रित करने जैसे सैकड़ों जरूरी काम करता है। यही वजह है कि लिवर की सेहत खराब होते ही पूरे शरीर का सिस्टम बिगड़ने लगता है।

जर्नल की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, मोटापे और शुगर ने बढ़ाई देश की टेंशन

मेडिकल जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हेपेटोलॉजी' में प्रकाशित एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिसर्च के अनुसार, आज के समय में शहरी भारत का हर तीन में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर (ग्रेड) के फैटी लिवर की समस्या से ग्रसित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे देश में युवाओं और वयस्कों के बीच मोटापा और ब्लड शुगर (डायबिटीज) के मामले बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे फैटी लिवर के मरीजों का यह ग्राफ भी लगातार खतरनाक रफ्तार से ऊपर की ओर भाग रहा है।

क्या घर पर ही रिवर्स हो सकता है फैटी लिवर? सिर्फ 5% वजन घटाने से दिखेगा चमत्कार

आम लोगों के बीच यह सवाल हमेशा बना रहता है कि क्या बिना दवाओं के फैटी लिवर को ठीक किया जा सकता है? इस पर डॉ. शलीन अग्रवाल ने बेहद सकारात्मक जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती अवस्था में इसे 100 फीसदी ठीक किया जा सकता है। इंसानी लिवर के पास खुद को दोबारा रिपेयर और रीजेनरेट करने की एक अद्भुत प्राकृतिक क्षमता होती है, बशर्ते उसे स्थायी नुकसान न पहुंचा हो। 'नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ' (NIH) के नेतृत्व में की गई कई वैश्विक स्टडीज में यह साबित हो चुका है कि अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर के कुल वजन का महज 5 प्रतिशत हिस्सा भी कम कर लेता है, तो उसके लिवर में जमा अतिरिक्त फैट तेजी से घटने लगता है। वहीं, अगर वजन में 7 से 10 प्रतिशत तक की कमी की जाए, तो लिवर की पुरानी सूजन और शुरुआती फाइब्रोसिस (लिवर पर बनने वाले निशान) को भी पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

क्रैश डाइट से बचें और अपनाएं ये जरूरी आदतें, वरना ट्रांसप्लांट ही बचेगा आखिरी रास्ता

डॉक्टरों ने फैटी लिवर को ठीक करने के चक्कर में अचानक खाना-पीना छोड़ने या क्रैश डाइट (Crash Diet) अपनाकर तेजी से वजन घटाने को बेहद नुकसानदेह बताया है। लिवर को स्वस्थ करने का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका यह है कि आप एक संतुलित और पौष्टिक भोजन लें, रोजाना कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें, रात में 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें और अपने ब्लड शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रण में रखें। डॉ. शलीन अग्रवाल ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर इस बीमारी को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह आगे चलकर लिवर की गंभीर सूजन (NASH), फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेलियर और अंततः लिवर कैंसर का रूप ले लेती है, जहां मरीज के पास लिवर ट्रांसप्लांट कराने के अलावा जिंदगी बचाने का और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।

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