प्रेगनेंसी में नॉर्मल चाय छोड़ ग्रीन टी पीना शुरू किया है? पहले जान लें ये जरूरी बातें, बच्चे पर पड़ सकता है असर
गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए बेहद नाजुक और जिम्मेदारी भरा होता है। इस दौरान खानपान की छोटी सी आदत भी गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर सीधा असर डालती है। अक्सर महिलाएं प्रेगनेंसी की पुष्टि होते ही अपनी जीवनशैली को सुधारने के लिए चाय-कॉफी की जगह 'हेल्दी' विकल्पों की ओर रुख करती हैं। कई बार गर्भवती महिलाएं दूध और चीनी वाली पारंपरिक चाय को पूरी तरह छोड़कर ग्रीन टी (Green Tea) पीना शुरू कर देती हैं, यह मानकर कि यह हर्बल है और पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन क्या वास्तव में प्रेगनेंसी में ग्रीन टी पीना पूरी तरह सुरक्षित है? स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) और बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ग्रीन टी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, लेकिन गर्भावस्था में इसके अत्यधिक या गलत तरीके से सेवन से बच्चे के विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।
ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और फोलिक एसिड पर इसका नकारात्मक प्रभाव
आम तौर पर लोग यह भूल जाते हैं कि ग्रीन टी कोई 'कैफीन-फ्री' ड्रिंक नहीं है। इसमें भी कैफीन की एक निश्चित मात्रा मौजूद होती है। हालांकि एक कप कॉफी या काली चाय की तुलना में ग्रीन टी में कैफीन कम होता है, लेकिन एक कप (लगभग 240 मिली) ग्रीन टी में 25 से 45 मिलीग्राम तक कैफीन पाया जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला का शरीर कैफीन को तेजी से मेटाबोलाइज नहीं कर पाता, जिससे यह कैफीन प्लेसेंटा (गर्भनाल) को पार करके सीधे भ्रूण तक पहुंच जाता है। भ्रूण का लिवर इतना परिपक्व नहीं होता कि वह कैफीन को पचा सके, जिससे शिशु के दिल की धड़कन बढ़ सकती है और गर्भपात (Miscarriage) या समय से पहले जन्म (Preterm Birth) का जोखिम पैदा हो सकता है।
इससे भी बड़ा खतरा फोलिक एसिड के अवशोषण को लेकर है। पहली तिमाही (First Trimester) में भ्रूण के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के सही निर्माण के लिए फोलिक एसिड (Folic Acid) सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, ग्रीन टी में 'एपिगैलोकैटेचिन गैलेट' (EGCG) नामक एक शक्तिशाली कैटेचिन पाया जाता है। यह तत्व शरीर में फोलिक एसिड के अवशोषण को बाधित कर देता है। यदि कोई गर्भवती महिला शुरुआत के तीन महीनों में जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीती है, तो उसके शरीर में फोलेट की कमी हो सकती है, जिससे नवजात शिशु में 'न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट' (Neural Tube Defects) जैसी जन्मजात विकृतियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
शरीर में आयरन के अवशोषण में रुकावट और एनीमिया का खतरा
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, जिसके लिए प्रचुर मात्रा में आयरन (Iron) की आवश्यकता होती है। ग्रीन टी में पाए जाने वाले 'टैनिन्स' (Tannins) और पॉलीफेनोल्स भोजन में मौजूद नॉन-हीम आयरन (पेड़-पौधों और शाकाहारी भोजन से मिलने वाला आयरन) के साथ बंध जाते हैं।
जब कोई महिला भोजन करने के तुरंत पहले या बाद में ग्रीन टी पीती है, तो आंतें भोजन से आयरन को सोख नहीं पातीं। इसके परिणामस्वरूप गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन तेजी से गिर सकता है और वह गंभीर एनीमिया (खून की कमी) की शिकार हो सकती है। एनीमिया के कारण मां को लगातार कमजोरी, चक्कर आना और सांस फूलने की समस्या होती है, जबकि शिशु का वजन कम (Low Birth Weight) रह सकता है।
प्रेगनेंसी में ग्रीन टी पीने की सुरक्षित सीमा और सही समय
गाइनेकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रीन टी से पूरी तरह परहेज करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे एक सख्त सीमा और सही समय पर पीना अनिवार्य है:
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मात्रा का सख्त नियम: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार, गर्भावस्था में दिनभर में 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन का सेवन बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यदि आप ग्रीन टी पीती हैं, तो दिनभर में 1 से अधिकतम 2 छोटे कप ही सुरक्षित माने जाते हैं।
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भोजन के तुरंत बाद न पिएं: ग्रीन टी को कभी भी अपने मुख्य भोजन (लंच या डिनर) या आयरन व फोलिक एसिड की दवाओं के साथ न पिएं। भोजन करने के कम से कम 1 से 2 घंटे बाद ही इसका सेवन करें ताकि पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित न हो।
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शाम के समय परहेज करें: ग्रीन टी में मौजूद कैफीन के कारण रात में अनिद्रा (Insomnia) और बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है, जिससे प्रेगनेंसी में मिलने वाली जरूरी नींद में खलल पड़ता है।
ग्रीन टी के सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प
यदि आप प्रेगनेंसी में चाय की तलब मिटाने के लिए कोई गर्म और सुकून देने वाला पेय तलाश रही हैं, तो ग्रीन टी के स्थान पर ये सुरक्षित प्राकृतिक विकल्प चुन सकती हैं:
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अदरक और नींबू की हर्बल चाय: यह सुबह होने वाली मतली (Morning Sickness) और उल्टी से तुरंत राहत दिलाती है।
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पिपरमिंट टी (Peppermint Tea): पेट की गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग को शांत करने में बेहद मददगार है।
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कैमोमाइल टी (सीमित मात्रा में): मानसिक तनाव को दूर कर अच्छी नींद लाने में सहायक होती है।
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गुनगुना नींबू-शहद पानी: शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और विटामिन सी की पूर्ति करता है।
गर्भावस्था के दौरान किसी भी नई हर्बल ड्रिंक या सप्लीमेंट को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह अवश्य लें, क्योंकि हर महिला का शरीर और प्रेगनेंसी की स्थिति अलग होती है।