Dengue Vaccine Qdenga Approval: भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन 'Qdenga' को DCGI की हरी झंडी! जानिए शरीर में कैसे काम करेगी यह डोज और किसे मिलेगा इसका सुरक्षा कवच

Dengue Vaccine Qdenga Approval: भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन 'Qdenga' को DCGI की हरी झंडी! जानिए शरीर में कैसे काम करेगी यह डोज और किसे मिलेगा इसका सुरक्षा कवच

हर साल मानसून और बरसात का मौसम शुरू होते ही देशभर में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। इसके साथ ही अस्पतालों में डेंगू (Dengue) मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल दर्ज किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में डेंगू के कुल मामलों में से लगभग एक-तिहाई मामले अकेले भारत में रिपोर्ट किए जाते हैं। वर्ष 2025 में ही देश में 1.13 लाख से अधिक लोग इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आए थे। इस गंभीर स्वास्थ्य संकट के बीच देशवासियों के लिए एक राहत भरी बड़ी खबर आई है— ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (Qdenga) को आपातकालीन उपयोग और बिक्री की मंजूरी दे दी है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह वैक्सीन डेंगू से होने वाली मौतों और प्लेटलेट्स (Platelets) गिरने के डर से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत बड़ा सुरक्षा कवच साबित होने वाली है।

जापान की कंपनी ने किया है तैयार, 43 देशों में पहले से है उपलब्ध

इस जीवनरक्षक डेंगू वैक्सीन को जापान की प्रसिद्ध फार्मास्यूटिकल कंपनी 'टाकेडा' (Takeda Pharmaceutical Company) द्वारा विकसित किया गया है:

  • ग्लोबल अप्रूवल: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पहले ही हरी झंडी दी जा चुकी इस वैक्सीन को दुनिया के 43 से अधिक देशों में सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • 32 मिलियन से अधिक डोज: साल 2022 में वैश्विक स्तर पर लॉन्च होने के बाद से अब तक दुनिया भर में करीब 32 मिलियन (3.2 करोड़) लोगों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है।

कैसे काम करती है क्यूडेंगा (Qdenga) वैक्सीन?

डेंगू का वायरस शरीर में प्रवेश करते ही प्लेटलेट्स को तेजी से खत्म करने लगता है। ऐसे में यह वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को मजबूत करने का काम करती है:

  • एंटीबॉडीज का निर्माण: वैक्सीन की डोज लगते ही शरीर का इम्यून सिस्टम डेंगू वायरस के चारों सेरोटाइप्स (DEN-1, DEN-2, DEN-3, DEN-4) को पहचान लेता है और उनके खिलाफ विशेष एंटीबॉडीज (Antibodies) बनाना शुरू कर देता है।

  • गंभीरता में कमी: यदि वैक्सीन लेने के बाद व्यक्ति को मच्छर काटता भी है, तो एंटीबॉडीज तुरंत वायरस को बेअसर कर देती हैं। इससे मरीज में 'डेंगू शॉक सिंड्रोम' (Dengue Shock Syndrome) या इंटरनल ब्लीडिंग जैसी गंभीर स्थिति पैदा नहीं होती और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना न के बराबर हो जाती है।

क्यों खतरनाक साबित होता है डेंगू का हमला?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू केवल एक सामान्य बुखार नहीं है। सही समय पर सही देखभाल न मिलने पर यह जानलेवा रूप ले सकता है:

  • प्लेटलेट्स में गिरावट और इंटरनल ब्लीडिंग: डेंगू हेमोरेजिक फीवर होने पर मरीज की प्लेटलेट्स अचानक बहुत नीचे गिर जाती हैं, जिससे शरीर के आंतरिक अंगों से खून का रिसाव (Internal Bleeding) और वाइट फ्लूइड लीकेज शुरू हो जाती है।

  • मल्टी-ऑर्गन फेलियर: प्लेटलेट्स और ब्लड प्रेशर कम होने से समय पर इलाज न मिलने पर मरीज का लिवर, किडनी और दिल काम करना बंद कर देते हैं, जिससे मल्टी-ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

DCGI की ओर से मिली इस मंजूरी के बाद जल्द ही यह वैक्सीन भारतीय बाजारों और प्रमुख निजी व सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे हर साल डेंगू से होने वाले नुकसान पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सकेगी।

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