चाय-कॉफी नहीं.. उसके ज्यादा गर्म होने से हो सकता है कैंसर का खतरा! इंटरनेशनल रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

चाय-कॉफी नहीं.. उसके ज्यादा गर्म होने से हो सकता है कैंसर का खतरा! इंटरनेशनल रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

सुबह की शुरुआत एक कप कड़क चाय या गरमा-गरम कॉफी की चुस्की के साथ करना दुनिया भर के करोड़ों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। कई लोगों को तो भाप उड़ती हुई, बिल्कुल खौलती चाय पीने की ऐसी आदत होती है कि कप थोड़ा भी ठंडा हो जाए तो वे उसे दोबारा गर्म करवाते हैं। यदि आप भी इन्हीं लोगों में शामिल हैं, तो सावधान हो जाइए। दुनिया भर की प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थाओं और कैंसर शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाय या कॉफी की पत्तियां या बीन्स नुकसानदायक नहीं हैं, बल्कि उनका जरूरत से ज्यादा तेज तापमान आपके गले और पेट को जोड़ने वाली नली (फूड पाइप) के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ और आईएआरसी की रिपोर्ट: 65 डिग्री से ऊपर का पेय 'संभावित कैंसरकारी'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर अनुसंधान शाखा, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) द्वारा किए गए वैश्विक अध्ययन में यह पाया गया कि अत्यधिक गर्म पेय पदार्थों का नियमित सेवन भोजन नली के कैंसर यानी इसोफेगल कैंसर (Esophageal Cancer) के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि खतरा चाय, कॉफी या दक्षिण अमेरिका में पिए जाने वाले 'माते' (Mate) के रासायनिक घटकों से नहीं है, बल्कि उस तरल पदार्थ के तापमान से है। जब कोई भी तरल पदार्थ 65 डिग्री सेल्सियस (149 डिग्री फ़ारेनहाइट) या उससे अधिक तापमान पर सीधा गले के नीचे उतारा जाता है, तो वह फूड पाइप की अंदरूनी कोमल म्यूकोसा झिल्ली को जला देता है। इसे मेडिकल भाषा में थर्मल इंजरी (Thermal Injury) कहा जाता है।

बार-बार थर्मल इंजरी से कोशिकाओं के डीएनए में म्यूटेशन

मानव शरीर की भोजन नली (Esophagus) की आंतरिक परतें बेहद संवेदनशील और नाजुक ऊतकों (Tissues) से बनी होती हैं। जब कोई व्यक्ति लगातार कई वर्षों तक रोजाना खौलती चाय या कॉफी पीता है, तो गले से पेट तक जाने वाली नली की कोशिकाएं बार-बार जलती हैं।

शरीर इन जले हुए ऊतकों को ठीक करने के लिए लगातार नई कोशिकाएं बनाता है। बार-बार जलने और बार-बार कोशिकाओं के पुनर्निर्माण (Cell Division) की इस अंतहीन प्रक्रिया के दौरान कोशिकाओं के डीएनए में त्रुटि (Genetic Mutation) होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। लंबे समय तक बना रहने वाला यह क्रोनिक इन्फ्लेमेशन धीरे-धीरे कार्सिनोमा यानी घातक कैंसर की गांठ में बदल जाता है।

सिगरेट और शराब पीने वालों के लिए दोगुना हो जाता है खतरा

मेडिकल जर्नल एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन के अनुसार, जो लोग खौलती गर्म चाय पीते हैं और साथ ही सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं अथवा शराब पीते हैं, उनमें इसोफेगल कैंसर का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले पांच गुना तक बढ़ जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिक गर्म तरल पदार्थ फूड पाइप की प्राकृतिक सुरक्षात्मक परत को छील देता है। इसके चलते तंबाकू का धुआं, निकोटिन और शराब में मौजूद कैंसरकारी रसायन (कार्सिनोजेन्स) सीधे और तेजी से भोजन नली के गहरे ऊतकों में समा जाते हैं, जिससे कैंसर की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र हो जाती है।

इसोफेगल कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज

भोजन नली का कैंसर अक्सर तब पकड़ में आता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। इसलिए यदि आपको अपनी आदतों के साथ-साथ शरीर में ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत सतर्क होना चाहिए:

  • भोजन निगलने में लगातार कठिनाई या दर्द महसूस होना (Dysphagia)।

  • सीने के बीच में लगातार भारीपन, जलन या अपच की समस्या बने रहना।

  • बिना किसी कारण के वजन में तेजी से गिरावट आना।

  • लगातार सूखी खांसी रहना या आवाज में भारीपन (कर्कशता) आना।

  • गर्म या ठोस चीजें खाते समय भोजन के नली में अटकने जैसा अहसास होना।

चाय-कॉफी का सुरक्षित आनंद लेने के आसान नियम

चाय और कॉफी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं, बशर्ते उन्हें सही तापमान पर पिया जाए। डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सलाह है कि:

  • कप या मग में चाय-कॉफी उड़ेलने के बाद उसे कम से कम 3 से 5 मिनट तक ठंडा होने दें।

  • पेय का तापमान जब गुनगुना या सहने योग्य (लगभग 50 से 55 डिग्री सेल्सियस) हो जाए, तभी उसकी चुस्की लें।

  • यदि पहला घूंट लेते समय जीभ या होंठ में जलन का अहसास हो, तो समझ जाएं कि यह तापमान आपकी अंदरूनी भोजन नली के लिए बेहद खतरनाक है।

  • चाय या कॉफी को थर्मस से सीधे मुंह में उड़ेलने की गलती कभी न करें।