क्या बारिश में आपकी किडनी भी प्यासी है? मानसून में 'हिडन डिहाइड्रेशन' का मूक हमला, लखनऊ के डॉक्टर ने चेताया

क्या बारिश में आपकी किडनी भी प्यासी है? मानसून में 'हिडन डिहाइड्रेशन' का मूक हमला, लखनऊ के डॉक्टर ने चेताया

जैसे ही देश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश और मानसून की दस्तक होती है, लोग प्राकृतिक रूप से पानी का सेवन कम कर देते हैं। ठंडे मौसम और कम प्यास के कारण आम जनता में यह भ्रामक धारणा घर कर जाती है कि डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) केवल चिलचिलाती गर्मियों की समस्या है। हालांकि, रीजेंसी हेल्थ, लखनऊ के नेफ्रोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ. आलोक कुमार पांडे ने एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। डॉ. पांडे के अनुसार, मानसून के महीनों में अत्यधिक नमी और मौसमी बीमारियों के चलते होने वाला 'हिडन डिहाइड्रेशन' चुपके से इंसानी किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।

उच्च आर्द्रता का मायाजाल: जानिए क्यों बारिश के मौसम में चुपके से घट जाता है वाटर लेवल

भले ही मानसून के दौरान तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है, लेकिन वायुमंडल में उमस (ह्यूमिडिटी) का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इस उमस भरे माहौल में हमारे शरीर से पसीने के रूप में तरल पदार्थ लगातार बाहर निकलते रहते हैं। चूंकि वातावरण में नमी अधिक होती है, इसलिए यह पसीना त्वचा से बहुत धीरे-धीरे वाष्पित होता है, जिसके कारण इंसानों को यह अहसास ही नहीं हो पाता कि वे कितनी मात्रा में पानी खो रहे हैं। इसके साथ ही, बरसात के मौसम में सक्रिय होने वाले गैस्ट्रोएंटेराइटिस, डायरिया, उल्टी और विभिन्न वायरल संक्रमण शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर को तेजी से घटा देते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

किडनी पर सीधा प्रहार: ब्लड सर्कुलेशन घटने से मंडरा रहा है प्री-रीनल एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा

मानव शरीर में मौजूद दोनों किडनियां रक्त को साफ करने, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह से निरंतर रक्त आपूर्ति (ब्लड सप्लाई) पर निर्भर करती हैं। डॉ. आलोक कुमार पांडे ने इसके जैविक प्रभाव को समझाते हुए कहा, "जब डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में रक्त की कुल मात्रा (ब्लड वॉल्यूम) कम हो जाती है, तो हमारा मस्तिष्क और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को बचाने के लिए रक्त प्रवाह को वहां डायवर्ट कर देता है। इसके परिणामस्वरूप, किडनी में होने वाला ब्लड सर्कुलेशन अचानक गिर जाता है, जो सीधे तौर पर प्री-रीनल एक्यूट किडनी इंजरी (Pre-Renal Acute Kidney Injury) का कारण बन सकता है।" इसके अतिरिक्त, पानी की कमी से यूरिन अत्यधिक गाढ़ा हो जाता है, जिससे किडनी स्टोन और यूटीआई (UTI) का खतरा चरम पर पहुंच जाता है।

सबसे ज्यादा खतरा किसे है? इन 8 श्रेणियों के लोगों को बरतनी होगी विशेष सावधानी

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून का यह मूक डिहाइड्रेशन किसी को भी अपना शिकार बना सकता है, लेकिन कुछ विशेष संवेदनशील समूहों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है:

  • बढ़ती उम्र के बुजुर्ग वयस्क

  • मधुमेह (डायबिटीज) और क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीज

  • छोटे बच्चे और लगातार यात्रा करने वाले लोग

  • धूप या खुले में काम करने वाले आउटडोर वर्कर्स और एथलीट्स

  • बुखार, दस्त या उल्टी जैसी मौसमी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति

  • ऑफिस जाने वाले पेशेवर जो पानी के बजाय अत्यधिक चाय, कॉफी या मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन करते हैं

मानसून में किडनी को सुरक्षित रखने के अचूक उपाय: इलेक्ट्रोलाइट्स की ऐसे करें तुरंत भरपाई

इस गंभीर स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए डॉ. पांडे ने केवल सादे पानी पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रोलाइट-समृद्ध तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी है। अगर आपको प्यास का अनुभव न भी हो, तो भी नियमित अंतराल पर छाछ, नींबू पानी (एक चुटकी नमक के साथ), और ताजा नारियल पानी का सेवन करते रहें। इसके साथ ही, अपने यूरिन (मूत्र) के रंग पर लगातार नजर रखें; यदि यूरिन का रंग हल्का पीला या पारदर्शी है, तो यह सही हाइड्रेशन का सूचक है, जबकि गहरा पीला रंग इस बात की चेतावनी है कि आपकी किडनी को तुरंत पानी की आवश्यकता है। बारिश के इस खुशनुमा मौसम में अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें और पर्याप्त हाइड्रेशन से अपनी किडनी को सुरक्षित रखें।

 

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