एंटीबायोटिक प्रतिरोध: क्या 'सुपरबग्स' के दौर में हम अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा खो रहे हैं... जानें बचाव के उपाय
पिछले कई दशकों से एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) चिकित्सा विज्ञान के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहे हैं। गले के सामान्य दर्द से लेकर बड़ी सर्जरी तक, ये दवाइयां लाखों लोगों की जान बचाती आई हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर वही दवाइयां अचानक काम करना बंद कर दें तो क्या होगा? डॉक्टरों का कहना है कि यह 'सुरक्षा कवच' धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल 'एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध' (AMR) नाम के एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट को जन्म दे रहा है।
क्या है एंटीबायोटिक प्रतिरोध और यह क्यों खतरनाक है?
एंटीबायोटिक प्रतिरोध वह स्थिति है जब बैक्टीरिया खुद को इस तरह विकसित कर लेते हैं कि दवाएं उन पर बेअसर हो जाती हैं। डॉ. आशिता सिंघल (बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजी और ऑन्कोलॉजी सलाहकार) बताती हैं कि बैक्टीरिया एक जीवित और अनुकूलनशील जीव हैं। जब हम बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेते हैं, तो कमजोर बैक्टीरिया तो मर जाते हैं, लेकिन जो बच जाते हैं, वे अधिक शक्तिशाली और प्रतिरोधक क्षमता वाले 'सुपरबग्स' (Superbugs) में बदल जाते हैं। यही सुपरबग्स अब साधारण संक्रमणों को भी जानलेवा बनाने में सक्षम हैं।
सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक का सेवन, सबसे बड़ी भूल
अक्सर लोग वायरल फ्लू या सर्दी-जुकाम होने पर खुद से एंटीबायोटिक की गोलियां खाना शुरू कर देते हैं, जबकि ये दवाएं केवल बैक्टीरिया पर काम करती हैं, वायरस पर नहीं। डॉ. सिंघल के अनुसार, दवाओं के इसी दुरुपयोग ने साधारण बीमारियों के लिए भी अब अधिक शक्तिशाली और महंगी दवाओं की जरूरत पैदा कर दी है। इसका मतलब है कि अब कई मरीज जो पहले घर पर ही ठीक हो जाते थे, उन्हें अब अस्पताल में भर्ती होने और नसों के जरिए उपचार (Intravenous therapy) लेने की नौबत आ रही है।
कमजोर मरीजों के लिए बढ़ रहा है जानलेवा खतरा
एंटीबायोटिक प्रतिरोध का सबसे दुखद पहलू उन मरीजों पर पड़ता है जिनकी इम्युनिटी पहले से ही कमजोर है। कैंसर का इलाज करा रहे बच्चे या अंग प्रत्यारोपण (Transplant) करवाने वाले मरीजों के लिए एंटीबायोटिक्स जीवन रक्षक होती हैं। डॉ. सिंघल चेतावनी देती हैं, "ऐसे मरीजों के लिए मानक दवाएं फेल होना सीधा मौत का बुलावा है। जब बैक्टीरिया सामान्य एंटीबायोटिक्स को नहीं मानते, तो हमारे पास मरीज की जान बचाने के लिए समय बहुत कम बचता है।"
कैसे थमेगा यह संकट? आपकी एक जिम्मेदारी बचा सकती है जान
इस खतरे को कम करने के लिए डॉक्टरों और आम जनता दोनों को सतर्क रहना होगा:
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डॉक्टर की सलाह पर ही लें: कभी भी स्वयं दवा न लें (Self-medication) और वायरल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक की मांग न करें।
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कोर्स पूरा करें: यदि डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी है, तो तबीयत ठीक लगने पर भी कोर्स बीच में न छोड़ें।
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दवा साझा न करें: कभी भी अपनी बची हुई एंटीबायोटिक किसी दूसरे को न दें और न ही दूसरों की दवा खुद लें।
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स्वच्छता अपनाएं: बार-बार हाथ धोएं और टीकाकरण (Vaccination) लगवाएं, ताकि संक्रमण होने की संभावना ही कम हो जाए।