हरियाणा के नए चीफ सेक्रेटरी की रेस हुई बेहद तेज! 30 जून को खत्म हो रहा मौजूदा मुख्य सचिव का सेवा विस्तार
हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी और प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़े पद को लेकर सुगबुगाहट और लॉबिंग का दौर बेहद तेज हो चुका है। राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसे लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। दरअसल, वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का केंद्र सरकार द्वारा दिया गया एक साल का सेवा विस्तार (Service Extension) आगामी 30 जून को समाप्त होने जा रहा है। इसके बाद हरियाणा को नया प्रशासनिक मुखिया मिलना तय माना जा रहा है। एक प्रशासनिक रिपोर्टर की नजर से देखें तो चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक नए मुख्य सचिव के नाम को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। इस रेस में 1990 बैच के दो बेहद कद्दावर और अनुभवी आईएएस (IAS) अधिकारियों का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
30 जून को समाप्त हो रहा है सीएस अनुराग रस्तोगी का कार्यकाल साल 1990 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी अनुराग रस्तोगी को पिछले साल केंद्र सरकार ने एक विशेष रियायत देते हुए एक साल का सेवा विस्तार दिया था, जिसके तहत उनका कार्यकाल 30 जून तक के लिए बढ़ाया गया था। अनुराग रस्तोगी के हटने के बाद उनके पुनर्वास की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं और उन्हें हरियाणा राइट टू सर्विस (RTS) कमीशन के चीफ कमिश्नर के पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि उनकी जगह मुख्य सचिव की इस सबसे पावरफुल कुर्सी की कमान अब किसे सौंपी जाएगी।
रेस में सबसे आगे चल रहे हैं 1990 बैच के ये दो बड़े नाम हरियाणा के नए मुख्य सचिव की इस हाई-प्रोफाइल दौड़ में इस समय दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं और दोनों ही 1990 बैच के बेहद सीनियर अफसर हैं। इनमें पहला नाम सुधीर राजपाल का है, जो वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS-गृह) जैसी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं, दूसरा बड़ा नाम सुमिता मिश्रा का है, जो इस समय फाइनेंशियल कमिश्नर रेवेन्यू (FCR) और आपदा प्रबंधन विभाग के शीर्ष पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक हलकों में इन दोनों ही अधिकारियों की छवि बेहद मजबूत और कुशल रणनीतिकार के रूप में मानी जाती है।
क्या कहती है हरियाणा ब्यूरोक्रेसी की सीनियरिटी और परंपरा अगर सीनियरिटी लिस्ट के आधार पर देखा जाए तो सुधीर राजपाल इस रेस में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। उनके बाद सुमिता मिश्रा का स्थान आता है। सुधीर राजपाल नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जबकि सुमिता मिश्रा जनवरी 2027 में रिटायर होंगी। हालांकि, राजनीति और प्रशासनिक नियुक्तियों के जानकारों का कहना है कि हरियाणा में हमेशा मुख्य सचिव का चयन सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर ही नहीं होता, बल्कि सरकार के साथ ट्यूनिंग और परफॉर्मेंस भी एक बड़ा फैक्टर होती है। एक परंपरा यह भी रही है कि अक्सर एफसीआर (FCR) पद पर तैनात अधिकारी को ही प्रमोट कर मुख्य सचिव बनाया जाता है, जिससे सुमिता मिश्रा की दावेदारी को भी कम नहीं आंका जा सकता।
महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और सुधारों में रहा है दोनों का बड़ा योगदान दावेदारों की परफॉर्मेंस की बात करें तो दोनों ही अधिकारियों के पास बेहद चुनौतीपूर्ण विभागों को संभालने का लंबा अनुभव है। सुमिता मिश्रा ने हाल ही में देश के तीन नए आपराधिक कानूनों को हरियाणा में जमीनी स्तर पर लागू कराने में पुलिस और अभियोजन विभाग के साथ मिलकर बहुत बड़ी भूमिका निभाई है, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। वहीं सुधीर राजपाल भी पूर्व में विकास एवं पंचायत, नागरिक उड्डयन, स्वास्थ्य और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के सीईओ जैसे बेहद महत्वपूर्ण और मलाईदार पदों पर अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अंतिम मुहर का सभी को बेसब्री से इंतजार फिलहाल अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को ही लेना है। सरकार ऐसे नाम पर मुहर लगाना चाहेगी जो आगामी समय में प्रशासनिक व्यवस्था को बिना किसी विवाद के सुचारू रूप से चला सके और सरकार की योजनाओं को जमीन पर तेजी से लागू करवा सके। 30 जून के नजदीक आते ही लॉबिंग और तेज होने की उम्मीद है। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री सुधीर राजपाल की सीनियरिटी पर भरोसा जताते हैं या फिर सुमिता मिश्रा को राज्य की प्रशासनिक कमान सौंपकर एक नया समीकरण तैयार करते हैं।