फरीदाबाद में दोस्त से बातें कर रहे 7वीं के छात्र पर खतरनाक पिटबुल कुत्ते का खौफनाक हमला

फरीदाबाद में दोस्त से बातें कर रहे 7वीं के छात्र पर खतरनाक पिटबुल कुत्ते का खौफनाक हमला

देशभर में खतरनाक नस्ल के कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है और एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के फरीदाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। फरीदाबाद में अपने ही एक दोस्त से सामान्य बातचीत कर रहे 7वीं कक्षा के मासूम छात्र पर एक आक्रामक पिटबुल कुत्ते ने अचानक पीछे से जानलेवा हमला कर दिया। इस खौफनाक हमले में कुत्ते ने छात्र के शरीर पर एक-दो नहीं बल्कि पूरे 16 अलग-अलग जगहों पर बुरी तरह से काटा और नोच डाला। इस अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और किसी तरह स्थानीय लोगों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्ते के चंगुल से बच्चे को छुड़ाया। गंभीर रूप से घायल छात्र को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में पालतू कुत्तों के मालिकों के प्रति भारी गुस्सा और दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है।

घटना के बारे में मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र शाम के वक्त अपने एक दोस्त के घर के बाहर खड़ा होकर उससे सामान्य बातें कर रहा था। उसी दौरान पड़ोसी का पालतू पिटबुल कुत्ता अचानक बिना किसी उकसावे के वहां आ गया और उसने सीधे मासूम बच्चे पर हमला बोल दिया। पिटबुल नस्ल की ताकत और आक्रामकता इतनी अधिक होती है कि एक बार जब वह किसी पर हमला कर देता है, तो उसे छुड़ाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कुत्ता लगातार बच्चे को खींचता रहा और उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों को अपने नुकीले दांतों से काटता रहा। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर दौड़े और बड़ी मशक्कत के बाद कुत्ते के जबड़े से बच्चे को आजाद कराया। यदि समय पर लोग वहां न पहुंचते, तो यह हादसा और भी ज्यादा भयानक रूप ले सकता था।

अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा मासूम, शरीर पर गहरे जख्मों के निशान

इस डरावने हमले में बुरी तरह जख्मी हुए 7वीं कक्षा के छात्र को तुरंत एक बड़े निजी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर पर 16 से अधिक गंभीर घाव हैं। कुत्ते ने उसके हाथों, पैरों, चेहरे और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों को बुरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी जान बचाने की कोशिश में जुटी हुई है और कई टांके लगाए गए हैं। अत्यधिक खून बह जाने के कारण और गहरे जख्मों के गहरे दर्द के चलते बच्चा गहरे सदमे में है। अस्पताल के बाहर मौजूद परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे इस बात से बेहद आक्रोशित हैं कि आखिर इस तरह के खतरनाक और जानलेवा कुत्तों को रिहायशी इलाकों में पालने वाले लोग सुरक्षा नियमों को लेकर इतने लापरवाह क्यों बने हुए हैं।

परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत तुरंत संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने पीड़ित परिवार के बयानों के आधार पर पिटबुल के मालिक के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पहले भी उस मालिक को चेतावनी दी थी कि उनका कुत्ता बहुत आक्रामक है और उसे बाहर निकालते समय हमेशा मुंह पर जाली (Muzzle) लगानी चाहिए, लेकिन मालिक की लगातार लापरवाही के कारण आज एक मासूम बच्चे को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही बरतने वाले मालिक को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

रिहायशी इलाकों में खतरनाक नस्ल के कुत्तों का आतंक और प्रशासन की ढिलाई

फरीदाबाद की यह घटना कोई पहली ऐसी घटना नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग शहरों से आए दिन पिटबुल, रोटवाइलर और डोबरमैन जैसे खतरनाक नस्ल के कुत्तों द्वारा बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमलों की खबरें सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद न तो स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस और कड़े दिशा-निर्देश सख्ती से लागू किए जा रहे हैं और न ही पालतू जानवरों के मालिकों के भीतर कानून का कोई डर दिखाई दे रहा है। कई शहरों के नगर निगमों ने इन खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने पर प्रतिबंध लगाने या उनके लिए लाइसेंस अनिवार्य करने के नियम बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन कराने में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। लोग अपनी शानो-शौकत के लिए खतरनाक कुत्तों को छोटे-छोटे फ्लैट्स और कॉलोनियों में पालते हैं, जिससे आसपास रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है।

विशेषज्ञों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि पिटबुल जैसी नस्लें अपनी अत्यधिक आक्रामकता के लिए जानी जाती हैं और बिना उचित ट्रेनिंग तथा नियंत्रण के इन्हें रिहायशी बस्तियों में खुला छोड़ना किसी बम से खेलने जैसा है। जब तक सरकार और स्थानीय नगर निकाय इस मामले में कड़े दंड के प्रावधान और भारी जुर्माने लागू नहीं करते, तब तक इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाना मुमकिन नहीं होगा। जनता अब यह मांग कर रही है कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से ऐसे खतरनाक कुत्तों को पालने वाले सभी लोगों का वेरिफिकेशन करना चाहिए और जिन लोगों के पास अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन जानवरों को रेस्क्यू सेंटर भेजना चाहिए ताकि आम जनता सुरक्षित महसूस कर सके।

पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग और नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान

इस पूरी दुर्घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है कि हमारे शहरों में रहने वाले आम नागरिकों और बच्चों की सुरक्षा आज कितनी भगवान भरोसे चल रही है। एक हंसता-खेलता बच्चा जो अपनी पढ़ाई और सामान्य जिंदगी में व्यस्त था, वह आज एक लापरवाह और खतरनाक कुत्ते के कारण अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। यूजर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि घायल बच्चे को और उसके परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और लापरवाह कुत्ते के मालिक को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। समाज के हर वर्ग से यह आवाज उठ रही है कि अब समय आ गया है जब प्रशासन को सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे मामलों में मिसाल कायम करने वाली सजा देनी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति दूसरों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।