हरियाणा पुलिस कस्टडी मामले में चौंकाने वाला यू-टर्न: कुकर्म और कैंसर के दावे निकले सफेद झूठ, जानें जांच की असली इनसाइड स्टोरी
हरियाणा में कथित पुलिस बर्बरता और हिरासत में प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पीड़ित युवक द्वारा लगाए गए संगीन आरोपों की जब उच्च स्तरीय जांच और मेडिकल स्क्रूटनी की गई, तो शुरुआती दावों की पूरी हवा निकल गई। जांच रिपोर्ट में साफ हो गया है कि इस पूरे घटनाक्रम को सनसनीखेज बनाने के लिए कई मनगढ़ंत कहानियां जोड़ी गई थीं।
मेडिकल रिपोर्ट में 'कुकर्म' और 'कैंसर' की थ्योरी खारिज
शुरुआती शिकायत में पीड़ित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि थाने के अंदर युवक के साथ पुलिसकर्मियों ने कुकर्म (अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न) जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। इसके साथ ही युवक के गंभीर रूप से बीमार होने और कैंसर से पीड़ित होने की बातें भी फैलाई जा रही थीं। हालांकि, अब आधिकारिक जांच और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में यह पूरी तरह साफ हो गया है कि कुकर्म और कैंसर, दोनों ही बातें पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद हैं।
घटना के वक्त नशे में धुत था युवक
मामले की जांच कर रही टीम के मुताबिक, जिस समय यह पूरा विवाद शुरू हुआ और युवक को हिरासत में लिया गया, उस दौरान युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। मेडिकल टेस्ट में उसके खून में अल्कोहल की पुष्टि हुई है। शराब के नशे में हुड़दंग करने और कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने के बाद ही उसे थाने लाया गया था।
सिर्फ मारपीट का आरोप साबित, पुलिसकर्मियों पर गिरेगी गाज
कुकर्म और बीमारी की कहानियां भले ही झूठी साबित हुई हों, लेकिन जांच एजेंसी ने पुलिस को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दी है। जांच में यह सच सामने आया है कि थाने के अंदर कानून को ताक पर रखकर पुलिसकर्मियों ने युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। कस्टडी में थर्ड डिग्री और मारपीट का आरोप पूरी तरह सही पाया गया है। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सख्त कानूनी शिकंजा कसना तय है, क्योंकि किसी भी आरोपी को पीटने का अधिकार कानून खाकी को नहीं देता।