SE गीतू राम तंवर सुसाइड केस: बिजली निगम के MD समेत 14 नामजद, SIT करेगी उच्च स्तरीय जांच

SE गीतू राम तंवर सुसाइड केस: बिजली निगम के MD समेत 14 नामजद, SIT करेगी उच्च स्तरीय जांच

देश के प्रशासनिक और कॉर्पोरेट गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी, संवेदनशील और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने बिजली निगम से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में भूचाल ला दिया है। बहुचर्चित सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर सुसाइड मामले में पुलिस और न्याय व्यवस्था ने शिकंजा कसते हुए दायरा काफी बड़ा कर दिया है। इस मामले में अब उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम या संबंधित पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) समेत कुल 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। मामले की संवेदनशीलता और इसमें जुड़े प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद अब इसकी जांच का जिम्मा एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी (SIT) को सौंप दिया गया है। एफआईआर में जैसे-जैसे नए नाम जुड़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे इस हाई-प्रोफाइल खुदकुशी मामले की परतें उधड़ रही हैं और कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस सनसनीखेज मामले के हर एक पहलू और अब तक के घटनाक्रम को आइए विस्तार से और गहराई के साथ समझते हैं।

क्या है SE गीतू राम तंवर सुसाइड मामला और क्यों तूल पकड़ रहा है यह प्रशासनिक आत्महत्या का केस

किसी भी सरकारी विभाग के उच्च पद पर आसीन अधिकारी द्वारा आत्महत्या जैसा चरम कदम उठाना अपने आप में कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े करता है। एसई गीतू राम तंवर की मौत के बाद से ही उनके परिजनों, सहकर्मियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार यह आरोप लगाया जा रहा था कि उन्हें उच्चाधिकारियों और कार्यस्थल पर मिलने वाली प्रताड़ना के कारण यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। शुरुआती दौर में पुलिस ने इस मामले में सामान्य जांच शुरू की थी, लेकिन जैसे-जैसे परिवार द्वारा दिए गए सबूत, सुसाइड नोट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले में बड़े अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका खुलकर सामने आने लगी। गीतू राम तंवर जैसे वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी का इस तरह से दुनिया को अलविदा कह जाना बिजली निगम के अंदर चल रही प्रशासनिक खींचतान, मानसिक दबाव और काम के तनाव के काले सच को उजागर करता है। इस घटना के बाद से पूरे महकमे में डर और गुस्से का मिला-जुला माहौल बना हुआ है।

बिजली निगम के एमडी समेत 14 लोगों का नामजद होना और एफआईआर में जोड़े गए नए नाम

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस द्वारा दर्ज की गई संशोधित एफआईआर में बिजली निगम के प्रबंध निदेशक (MD) समेत कुल 14 रसूखदार लोगों को नामजद किया गया। इन पर मृतक अधिकारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, कार्यस्थल पर अपमानित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) जैसी बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। परिवार और यूनियन के सदस्यों का आरोप है कि गीतू राम तंवर पर लगातार गलत काम करने का दबाव बनाया जा रहा था और जब उन्होंने नियमों के खिलाफ जाकर फाइलों पर हस्ताक्षर करने से मना किया, तो उन्हें प्रशासनिक स्तर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। एफआईआर में जैसे-जैसे नए नाम जोड़े जा रहे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि इस मामले की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक पूरा सिस्टम जिम्मेदार है जो अधिकारियों को मानसिक तनाव के दलदल में धकेल देता है।

एसआईटी (SIT) करेगी मामले की तहकीकात, क्या कानून के शिकंजे में आएंगे बड़े अधिकारी

मामले की गंभीरता और इसमें कई उच्चाधिकारियों के नाम आने के बाद शासन और पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। एसआईटी अब इस पूरे प्रकरण की वैज्ञानिक, तकनीकी और दस्तावेजी जांच करेगी। टीम द्वारा सभी नामजद आरोपियों से पूछताछ करने, उनके कॉल डिटेल्स, ऑफिस की फाइलों और पिछले कुछ महीनों के कम्युनिकेशंस को खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिजनों की मांग है कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने यह बहस फिर से छेड़ दी है कि सरकारी विभागों में काम करने वाले ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे यह तय है कि इस मामले में अभी कई और बड़े खुलासे होना बाकी हैं।