हरियाणा कांग्रेस में सियासी घमासान: प्रभारी के सामने भिड़े हुड्डा और सुरजेवाला, कुमारी सैलजा के तंज ने बढ़ाई मुश्किलें
पंजाब के बाद अब हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है। पार्टी आलाकमान द्वारा गुटबाजी को थामने की तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदेश इकाई में सब कुछ ठीक होता नजर नहीं आ रहा है। हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी के सामने ही बड़े नेताओं के बीच हुई तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप ने पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच, वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी के नेता एक-दूसरे को नमस्ते तक नहीं करते। यह वाकयुद्ध अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे गर्म विषय बना हुआ है।
प्रभारी के सामने आमने-सामने आए दिग्गजों के बोल
हरियाणा कांग्रेस में चल रही इस गुटबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश प्रभारी के दौरे के दौरान भी नेताओं ने अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के बीच हुई तल्ख नोकझोंक ने पार्टी की एकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभारी के सामने ही 'वर्डवार' (शब्दों के युद्ध) में नेताओं ने एक-दूसरे की कार्यशैली पर सवाल उठाए, जिससे वहां मौजूद अन्य पदाधिकारी भी असहज नजर आए। यह वाकया उस समय हुआ जब पार्टी का मुख्य फोकस आगामी चुनावी रणनीतियों को मजबूती देने पर होना चाहिए था।
सैलजा का कड़वा सच: न संवाद, न मेल-मिलाप
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कुमारी सैलजा ने पार्टी की जमीनी हकीकत बयां कर दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि हरियाणा कांग्रेस के नेताओं के बीच संवाद की भारी कमी है। सैलजा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि नेता एक-दूसरे को नमस्ते तक करना पसंद नहीं करते। उनका यह बयान पार्टी के अंदर 'हाइ-कमांड' के प्रति अविश्वास और नेताओं के बीच के गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका सीधा असर पार्टी के वोट बैंक और चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस की एकजुटता पर बड़ा संकट
हरियाणा में कांग्रेस का चुनावी गणित काफी हद तक इन बड़े नेताओं की आपसी तालमेल पर टिका है। लेकिन जिस तरह से आए दिन गुटबाजी की खबरें बाहर आ रही हैं, उसने कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का काम किया है। हुड्डा खेमा और विरोधी धड़े के बीच जारी यह खींचतान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। कांग्रेस प्रभारी अब इस गुटबाजी को रोकने के लिए किस तरह का कदम उठाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, हरियाणा कांग्रेस में चल रही यह अंतर्कलह पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिससे पार पाना आलाकमान के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।