गुरुग्राम प्रोग्राम में नहीं बुलाया तो भड़के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, नितिन नवीन के सामने फूटा गुस्सा

गुरुग्राम प्रोग्राम में नहीं बुलाया तो भड़के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, नितिन नवीन के सामने फूटा गुस्सा

हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर अंदरूनी कलह और सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। गुरुग्राम में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। मंच पर उनके साथ बिहार सरकार के मंत्री और हरियाणा मामलों के सह-प्रभारी नितिन नवीन भी मौजूद थे, जिनकी मौजूदगी में राव इंद्रजीत सिंह ने मंच से ही अपनी ही पार्टी की सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा। हालात तब और अधिक दिलचस्प हो गए जब केंद्रीय मंत्री ने सार्वजनिक मंच से यह तक कह दिया कि उनका नाम तक आमंत्रित अतिथियों की सूची में नहीं है। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर हरियाणा भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक क्यों नहीं चल रहा है।

समीक्षा बैठक में प्रोटोकॉल और अनदेखी का उठा बड़ा मुद्दा

यह पूरा वाकया गुरुग्राम में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान का है, जहां जिले के विकास कार्यों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और भविष्य की योजनाओं पर मंथन किया जाना था। इस प्रकार की बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खासकर उस क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। हालांकि, जब बैठक की कार्यवाही शुरू हुई और भाषणों का दौर आया, तो राव इंद्रजीत सिंह ने अपनी ही सरकार के तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई विधिवत सूचना नहीं दी गई और प्रोटोकॉल के तहत जिस तरह से उनका नाम और सम्मान होना चाहिए था, उसकी पूरी तरह से अनदेखी की गई है। अहीरवाल बेल्ट के सबसे बड़े और कद्दावर नेता माने जाने वाले राव इंद्रजीत सिंह के इस तेवर ने वहां मौजूद सभी अधिकारियों और नेताओं को असहज कर दिया।

नितिन नवीन की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया

जिस समय राव इंद्रजीत सिंह अपना यह दर्द बयां कर रहे थे, ठीक उसी समय मंच पर बिहार सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन भी उपस्थित थे। नितिन नवीन को हरियाणा में पार्टी मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने तथा आपसी समन्वय बिठाने के उद्देश्य से गुरुग्राम पहुंचे थे। केंद्रीय मंत्री ने नितिन नवीन की मौजूदगी का लाभ उठाते हुए पार्टी के भीतर और प्रशासनिक स्तर पर चल रही मनमानी पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते और इस क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व करने के बावजूद यदि उन्हें ही ऐसे आयोजनों से दूर रखा जाएगा या उनकी उपेक्षा की जाएगी, तो आम जनता और कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाएगा। इस तीखी नाराजगी के बाद पूरे सभागार में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया और सभी की निगाहें सह-प्रभारी नितिन नवीन पर टिक गईं।

अहीरवाल बेल्ट के राजनीतिक समीकरण और वर्चस्व की जंग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राव इंद्रजीत सिंह की यह नाराजगी महज़ एक आमंत्रण पत्र या प्रोटोकॉल की चूक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे हरियाणा की राजनीति और विशेषकर अहीरवाल क्षेत्र के वर्चस्व की लंबी कहानी जुड़ी हुई है। राव इंद्रजीत सिंह लंबे समय से गुरुग्राम और आसपास के जिलों में निर्विवाद नेता के रूप में अपनी पैठ बनाए हुए हैं। कई मौकों पर उन्होंने पार्टी मंचों से अपनी ही सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर उनकी अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। उनका यह स्पष्ट रूप से बागी तेवर दिखाना इस बात की ओर इशारा करता है कि स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों और प्रशासनिक मशीनरी के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। कार्यक्रम के दौरान उनकी इस खरी-खोटी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि हरियाणा में विधानसभा चुनावों और अन्य राजनीतिक उठापटक के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना केंद्रीय नेतृत्व की पहली प्राथमिकता है।

पार्टी संगठन और सरकार के सामने डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती

इस तीखे घटनाक्रम के बाद गुरुग्राम से लेकर चंडीगढ़ तक राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और भाजपा संगठन पर हमलावर हो गए हैं, उनका कहना है कि जिस पार्टी के केंद्रीय मंत्री ही सुरक्षित नहीं हैं और खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, वह आम जनता के हितों की रक्षा क्या करेगी। वहीं दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता और संगठन के पदाधिकारी इस डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेता इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री की नाराजगी को जल्द से जल्द दूर किया जाए ताकि इसका नकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में पार्टी की छवि पर न पड़े। प्रशासनिक स्तर पर भी इस बात की सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि आखिर इस चूक के पीछे जिम्मेदार कौन अधिकारी थे, जिनके कारण केंद्रीय मंत्री का नाम सूची से गायब हुआ। आने वाले दिनों में यह विवाद हरियाणा की राजनीति में और क्या नए रंग दिखाता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

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