अमेरिका में भारतीय एजेंसियों की बड़ी कामयाबी: पकड़ा गया कुख्यात गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया

अमेरिका में भारतीय एजेंसियों की बड़ी कामयाबी: पकड़ा गया कुख्यात गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया

अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क और भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे शिकंजे में भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों को एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में खौफ का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका में स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों की मदद से हिरासत में ले लिया गया है। भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं, ताकि उसे जल्द से जल्द भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग और इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के समन्वय का परिणाम है। नीरज फरीदपुरिया पिछले कई वर्षों से फर्जी पासपोर्ट और जाली पहचान दस्तावेजों के आधार पर भारत से फरार होकर विदेश में छिपा बैठा था और वहीं से भारत में अपने सिंडिकेट के जरिए रंगदारी, लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) और जबरन वसूली का काला साम्राज्य चला रहा था।

हरियाणा से अमेरिका तक का आपराधिक सफर: कौन है नीरज फरीदपुरिया?

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के फरीदपुर गांव का रहने वाला नीरज शर्मा उर्फ नीरज फरीदपुरिया शुरुआत में स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे अपराधों में शामिल था। धीरे-धीरे उसने दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद के बड़े कारोबारियों, सट्टेबाजों और बिल्डरों को धमकी देकर रंगदारी वसूलना शुरू कर दिया।

अपराध की दुनिया में तेजी से कदम बढ़ाते हुए उसने उत्तर भारत के कई बड़े कुख्यात आपराधिक गिरोहों के साथ साठगांठ कर ली। देखते ही देखते वह दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के सबसे खूंखार और मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल हो गया। जब हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए शिकंजा कसा, तो वह भारत-नेपाल सीमा का फायदा उठाकर देश से बाहर भाग निकला और बाद में डंकी रूट (Donkey Route) तथा फर्जी दस्तावेजों के सहारे अमेरिका जा पहुंचा।

दिल्ली-NCR और हरियाणा में 51 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज

नीरज फरीदपुरिया का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद खौफनाक है। पुलिस और जांच एजेंसियों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 51 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

इन मुकदमों में हत्या (Murder), हत्या का प्रयास (Attempt to Murder), रंगदारी (Extortion), आर्म्स एक्ट (Arms Act), अपहरण और मकोका (MCOCA) जैसे कड़े कानून के तहत दर्ज केस शामिल हैं। फरीदाबाद और गुरुग्राम के कई चर्चित हत्याकांडों में सीधे तौर पर उसका नाम सामने आया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विदेश में रहते हुए भी वह एन्क्रिप्टेड कॉलिंग ऐप्स और इंटरनेट कॉल्स के जरिए भारतीय व्यापारियों को जान से मारने की धमकियां देकर करोड़ों रुपये की प्रोटेक्शन मनी मांगता था।

लॉरेंस बिश्नोई और बंबीहा सिंडिकेट से गठजोड़ का कूटनीतिक नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक, नीरज फरीदपुरिया का नाम केवल व्यक्तिगत अपराधों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने विदेश में बैठकर उत्तर भारत के बड़े गैंगस्टरों के साथ गठजोड़ कर रखा था। वह हथियार आपूर्ति, शूटर उपलब्ध कराने और भारत में अवैध धन (हवाला नेटवर्क) की लेनदेन संभालने में मुख्य भूमिका निभाता था।

अमेरिका, कनाडा और दुबई में बैठे अन्य भारतीय भगोड़ों के साथ मिलकर उसने एक बड़ा सिंडिकेट बना लिया था, जो भारत में वारदातों को अंजाम देने के बाद शूटरों को सुरक्षित ठिकाना देने और कानूनी मदद पहुंचाने का काम करता था। यही वजह थी कि एनआईए (NIA) ने उसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना था और उसकी संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की थी।

प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया और भारतीय कानून का शिकंजा

अमेरिका में नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) अमेरिकी न्याय विभाग के साथ संपर्क में हैं। सीबीआई (CBI), जो भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है, नीरज के खिलाफ दर्ज सभी 51 मुकदमों के डोजियर और डिजिटल साक्ष्यों को अमेरिकी अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होते ही उसे भारत लाया जाएगा, जहाँ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और हरियाणा एसटीएफ (STF) उससे गहन पूछताछ करेंगी। उसकी भारत वापसी से दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय कई अन्य विदेशी सिंडिकेट्स और हवाला ऑपरेटरों के राज खुलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।