फरीदाबाद में कांग्रेस के वोट चोरी विरोध प्रदर्शन के दौरान अचानक भड़का हाई-वोल्टेज ड्रामा
राजनीतिक दलों द्वारा जनता के मुद्दों को लेकर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन और रैलियां अक्सर अपनी मांगों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कई बार ये आयोजन अनुशासनहीनता और आपसी गुटबाजी के कारण गलत कारणों से चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला और शर्मनाक मामला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद से सामने आया है, जहां कांग्रेस पार्टी द्वारा 'वोट चोरी' के विरोध में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता और कार्यकर्ता अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे, और शुरुआती माहौल पूरी तरह से सरकार विरोधी नारों और भाषणों से गूंज रहा था। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ और रैलियों का सिलसिला आगे बढ़ा, वैसे-वैसे मंच के आसपास और पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही आंतरिक कलह और खींचतान सतह पर आ गई। विरोध प्रदर्शन की इस गंभीर और संवेदनशील पृष्ठभूमि के बीच कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद शायद ही वहां मौजूद किसी भी समर्थक या नेता ने की होगी, और राजनीतिक मंच कुछ ही पलों में एक अखाड़े में तब्दील हो गया।
‘धक्का क्यों मार रही है?’, बहस से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बना खूनी संघर्ष का रूप
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य मंच के पास उस वक्त अचानक सनसनी फैल गई जब कांग्रेस पार्टी की ही दो प्रमुख महिला नेत्रियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़भाड़ और आगे खड़े होने की होड़ के दौरान जब एक नेत्री ने दूसरी को धक्का लगने पर आपत्ति जताई, तो बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। देखते ही देखते यह छोटी सी कहासुनी इतनी अधिक आक्रामक हो गई कि दोनों महिला नेत्रियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने पार्टी की गरिमा तथा सार्वजनिक मंच की मर्यादा को ताक पर रख दिया। वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और दोनों नेत्रियों ने एक-दूसरे पर गालियों और तीखे शब्दों की बौछार करने के बाद शारीरिक रूप से हमला बोल दिया। इस अप्रत्याशित और नाटकीय घटनाक्रम को देखकर वहां खड़े अन्य कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता अवाक रह गए, क्योंकि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि वे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने आए थे या अपनी ही पार्टी के नेताओं का यह तमाशा देखने के लिए इकट्ठा हुए थे।
एक-दूसरे को जड़े ताबड़तोड़ 7-8 थप्पड़, मचे हंगामे के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मामला तब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया जब बहस कर रही दोनों महिला नेत्रियों ने गुस्से में आकर एक-दूसरे पर हाथ उठा दिया और देखते ही देखते वहां ताबड़तोड़ थप्पड़बाजी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों ने आपस में एक-दूसरे को करीब 7 से 8 जोरदार थप्पड़ जड़ दिए, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षा में मौजूद लोगों ने बीच-बचाव करके बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया, लेकिन तब तक वहां मौजूद तमाशबीनों ने इस पूरे वाकये को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद कर लिया था। चंद मिनटों के भीतर ही फरीदाबाद की इस थप्पड़बाजी का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), फेसबुक और व्हाट्सएप पर आग की तरह वायरल हो गया। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कांग्रेस पार्टी की कार्यप्रणाली और आंतरिक अनुशासन पर जमकर चुटकियां लेनी शुरू कर दीं, जिससे पार्टी के स्थानीय नेतृत्व की किरकिरी हो गई। एक तरफ जहां पार्टी के बड़े नेता इस गंभीर विरोध प्रदर्शन के जरिए जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं इस आंतरिक कलह ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
राजनीतिक गलियारों में मची खलबली, अनुशासनहीनता पर आलाकमान की टेढ़ी नजर
फरीदाबाद की इस शर्मनाक घटना के बाद से हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और कांग्रेस पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता का मुद्दा एक बार फिर सबसे ऊपर आ गया है। इस तरह की सार्वजनिक घटनाओं से न केवल पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचता है, बल्कि जनता के बीच भी यह गलत संदेश जाता है कि जो दल खुद अपने घर को नहीं संभाल पा रहा है, वह सरकार का विरोध करने का नैतिक अधिकार कैसे रखता है। पार्टी के उच्च स्तर के सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित महिला नेत्रियों और आयोजकों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। विरोध प्रदर्शन जैसे गंभीर मंचों पर इस तरह की ओछी हरकतें राजनीतिक परिपक्वता की कमी को दर्शाती हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटता है। अंततः, फरीदाबाद का यह 'वोट चोरी प्रोटेस्ट' अपनी मुख्य राजनीतिक मांग से भटककर कांग्रेस की आपसी फूट और सड़क छाप झगड़े के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर सकता है।