हिसार में हरियाणा रोडवेज की हड़ताल: लंबित वित्तीय भत्तों का भुगतान न होने से भड़के कर्मचारी
हरियाणा के हिसार जिले से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और परेशान कर देने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से अटके हुए वित्तीय भत्तों और अन्य जायज मांगों का भुगतान न होने से नाराज हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हिसार डिपो के रोडवेज कर्मचारियों ने पूर्ण हड़ताल का ऐलान करते हुए डिपो की कुल 259 बसों के पहियों को पूरी तरह से थाम दिया है। तड़के सुबह से ही डिपो से एक भी सरकारी बस बाहर नहीं निकली, जिसके कारण हिसार बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा हुआ है और अपने गंतव्य तक जाने वाले हजारों यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों और शासन स्तर पर ज्ञापन देने के बावजूद जब उनकी जायज वित्तीय मांगों की अनदेखी की गई, तो उन्हें मजबूरन यह सख्त कदम उठाना पड़ा। आइए जानते हैं हिसार रोडवेज हड़ताल की पूरी जमीनी हकीकत और इससे जनता पर पड़ रहे असर की विस्तृत रिपोर्ट।
क्यों भड़के हिसार डिपो के रोडवेज कर्मचारी? जानिए किन मुख्य वित्तीय मांगों पर अड़ा है यूनियन
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रांतीय और स्थानीय नेताओं के अनुसार, यह हड़ताल कर्मचारियों के सालों से लंबित पड़े वित्तीय भत्तों और बकायों के भुगतान न होने के विरोध में की गई है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में ओवरटाइम का बकाया भुगतान, रात्रि ठहराव भत्ता, चालक-परिचालकों का बकाया बोनस, और अर्जित अवकाश के बदले मिलने वाली राशि का त्वरित निस्तारण शामिल है। डिपो नेताओं का आरोप है कि पिछले कई महीनों से हिसार डिपो के प्रशासनिक अधिकारी बजट की कमी का हवाला देकर कर्मचारियों के बकायों पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, विभाग में खाली पड़े पदों पर पक्की भर्ती करने और बेड़े में नई बसें शामिल करने की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है। बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी जब खाते में पैसे नहीं पहुंचे, तो कर्मचारियों का धैर्य टूट गया और उन्होंने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का रास्ता चुन लिया।
हिसार बस स्टैंड पर मचा हाहाकार: हजारों यात्रियों के सफर पर लगा ब्रेक, ऑटो वालों की चांदी
सुबह-सुबह काम पर निकलने वाले नौकरीपेशा लोगों, कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं और दूर-दराज के शहरों की यात्रा करने वाले आम यात्रियों के लिए यह हड़ताल किसी दुःस्वप्न से कम साबित नहीं हुई। हिसार बस स्टैंड पर सुबह 5 बजे से ही यात्रियों का तांता लगना शुरू हो गया था, लेकिन बसों के पहिए बंद देखकर लोगों के पसीने छूट गए। दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, सिरसा, रोहतक और भिवानी जाने वाले यात्री घंटों तक प्लेटफॉर्म पर अपनो सामान के साथ बैठकर बसों का इंतजार करते नजर आए। सरकारी बसों का संचालन बंद होने का सीधा फायदा निजी बस संचालकों और ऑटो-टैक्सी चालकों ने उठाया। निजी वाहन चालकों ने मजबूरी का फायदा उठाते हुए यात्रियों से दोगुना और तिगुना किराया वसूलना शुरू कर दिया, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया।
प्रशासन के साथ वार्ता रही बेनतीजा: रोडवेज यूनियन ने दी उग्र आंदोलन की बड़ी चेतावनी
हड़ताल की सूचना मिलते ही हिसार डिपो के जीएम (General Manager) और स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तुरंत डिपो परिसर पहुंचे और धरना दे रहे कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कर्मचारी नेताओं के साथ बंद कमरे में एक दौर की वार्ता भी की और बकाया भत्तों को जल्द जारी करवाने का मौखिक आश्वासन दिया। हालांकि, रोडवेज यूनियन के नेताओं ने किसी भी मौखिक आश्वासन को मानने से साफ इंकार कर दिया। यूनियन का स्पष्ट रुख है कि जब तक लंबित भत्तों के भुगतान का लिखित आदेश और बजट जारी नहीं किया जाता, तब तक एक भी बस को डिपो से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और परिवहन विभाग ने उनकी मांगों का जल्द स्थाई समाधान नहीं निकाला, तो यह हड़ताल केवल हिसार तक सीमित न रहकर पूरे हरियाणा राज्य के सभी डिपो में फैला दी जाएगी।
राज्य स्तर पर फैल सकता है हड़ताल का दायरा: आम जनता को कब मिलेगी इस संकट से राहत?
हिसार में 259 बसों के चक्का जाम होने से न केवल हिसार बल्कि पूरे पश्चिमी हरियाणा और पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाला अंतरराज्यीय परिवहन नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय व्यापार मंडल और यात्री संघों ने भी सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर इस मामले को सुलझाने की अपील की है ताकि आम नागरिकों को और अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल हिसार बस स्टैंड पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या हिंसा को रोका जा सके। अब सभी की निगाहें चंडीगढ़ में होने वाली उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक पर टिकी हैं कि क्या सरकार रोडवेज कर्मचारियों की वित्तीय मांगों को मानकर इस चक्का जाम को समाप्त करवा पाती है या फिर आने वाले दिनों में यह परिवहन संकट और गहराता जाएगा।