हरियाणा : 1.99 करोड़ वोटरों को मिले गणना प्रपत्र, जानिए जाटलैंड के सियासी गढ़ में कहां तक पहुंची 'SIR' की रफ्तार
हरियाणा की सियासत में आगामी चुनावों को लेकर प्रशासनिक और लोकतांत्रिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर एक बहुत बड़ा अभियान पूरा कर लिया है। इसके तहत सूबे के करीब 1.99 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं तक विशेष गणना प्रपत्र पहुंचाने का काम सफलतापूर्वक किया गया है, जिसने राज्य के सियासी पारे को और बढ़ा दिया है।
चुनाव आयोग का महाअभियान और करोड़ों वोटर्स का डेटा
चुनाव आयोग के पुख्ता आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा के कोने-कोने में मतदाताओं की सूचियों को दुरुस्त करने और हर एक नागरिक की भागीदारी तय करने के लिए यह व्यापक अभियान चलाया गया। 1.99 करोड़ वोटरों को ये प्रपत्र सौंपे जाने के बाद अब फर्जी वोटिंग और डेटा विसंगतियों पर पूरी तरह से लगाम कसने की उम्मीद जताई जा रही है। डिजिटल और ऑन-ग्राउंड वेरिफिकेशन के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है।
जाटलैंड में 'SIR' को लेकर क्यों बढ़ी उत्सुकता?
इस पूरे चुनावी बंदोबस्त के बीच सबसे ज्यादा चर्चा हरियाणा के दिल कहे जाने वाले 'जाटलैंड' (रोहतक, जींद, सोनीपत, झज्जर जैसे जिलों) की हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जाटलैंड में एसआईआर (Statutory Investigation Report / Voter Status Index Report) की मौजूदा स्थिति क्या है। जाटलैंड के सियासी गढ़ में वोटरों के इस नए वेरिफिकेशन और रुझान ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि यहीं से सूबे की सत्ता का रास्ता तय होता है।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर पूरा फोकस
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि गणना प्रपत्रों के वितरण और जाटलैंड सहित पूरे हरियाणा में एसआईआर मैपिंग की प्रक्रिया को बेहद गोपनीय और पारदर्शी तरीके से मॉनिटर किया जा रहा है। एआई-संचालित डेटा मैनेजमेंट और स्थानीय बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की मुस्तैदी से इस काम को समय रहते पूरा करने की कोशिश की जा रही है ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।