हरियाणा : कागजों में प्राइवेट बनाकर बेची गई 1856 कनाल शामलात भूमि, 7 राजस्व अधिकारियों समेत 112 लोगों पर गिरी गाज

हरियाणा : कागजों में प्राइवेट बनाकर बेची गई 1856 कनाल शामलात भूमि, 7 राजस्व अधिकारियों समेत 112 लोगों पर गिरी गाज

हरियाणा के राजस्व विभाग से एक बेहद चौंकाने वाला और सरकारी खजाने को चूना लगाने वाला बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य में भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से जुड़ा एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसमें कागजों की हेराफेरी करके सरकारी शामलात जमीन को चुपचाप निजी संपत्ति के रूप में बेच दिया गया। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है कि करीब 1856 कनाल शामलात भूमि को शातिराना तरीके से खुर्द-बुर्द किया गया है। इस गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता पर कड़ा एक्शन लेते हुए सरकार ने सात बड़े राजस्व अधिकारियों समेत कुल 112 लोगों को चार्जशीट कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

कैसे रची गई साजिश: शामलात जमीन को निजी बनाने का पूरा खेल

राजस्व विभाग की शुरुआती रिपोर्ट और विजलेंस जांच के मुताबिक, इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए सरकारी दस्तावेजों में भारी फेरबदल किया गया था। गांव की साझा संपत्ति मानी जाने वाली 'शामलात जमीन' पर मालिकाना हक दिखाने के लिए फर्जी प्रविष्टियां दर्ज की गईं और नियमों को ताक पर रखकर इसे निजी व्यक्तियों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया। भू-माफियाओं, बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट पटवारियों व तहसीलदारों की साठगांठ के बिना इतना बड़ा खेल होना नामुमकिन माना जा रहा है। आरोपियों ने बहुत ही शातिर तरीके से रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों में हेराफेरी की ताकि किसी को भनक न लगे, लेकिन जब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा और शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाली परतें उधड़ती चली गईं।

7 बड़े राजस्व अधिकारियों समेत 112 लोगों पर एक्शन, सरकार का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस भू-घोटाले में संलिप्त पाए गए 7 प्रमुख राजस्व अधिकारियों यानी तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और गिरदावरों के साथ-साथ कुल 112 लोगों को औपचारिक रूप से चार्जशीट कर दिया गया है। सरकार के इस कड़े रुख से साफ संदेश दे दिया गया है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने या दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चार्जशीट किए गए इन तमाम आरोपियों से अब विभागीय पूछताछ की जा रही है और उनके संपर्कों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध गठजोड़ के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।

ग्रामीण इलाकों और पंचायती जमीनों पर मंडराता खतरा और भविष्य की प्रशासनिक सख्ती

इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायती और शामलात जमीनों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामले न केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उन आम नागरिकों और किसानों के अधिकारों का भी हनन करते हैं जो इन जमीनों का सामुदायिक उपयोग करते हैं। प्रशासन अब राज्य भर के सभी जिलों में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल ऑडिट कराने और पुराने मामलों की री-चेकिंग करने पर विचार कर रहा है ताकि इस तरह की धांधली पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके। जनता और स्थानीय लोगों ने सरकार की इस कार्रवाई की सराहना की है और मांग की है कि इस घोटाले में शामिल मास्टरमाइंड्स की संपत्तियां कुर्क की जाएं ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या भू-माफिया इस तरह की हिम्मत न जुटा सके।