दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर महाजाम से हाहाकार: सरहौल बॉर्डर पर रेंगते नजर आए हजारों वाहन

दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर महाजाम से हाहाकार: सरहौल बॉर्डर पर रेंगते नजर आए हजारों वाहन

देश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच की आवाजाही शुक्रवार की शाम को एक बार फिर से लाखों यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने जैसी साबित हुई। दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर (Delhi-Gurugram Border) और विशेष रूप से ऐतिहासिक सरहौल बॉर्डर (Sirhaul Border) पर ऐसा भयंकर महाजाम लगा कि हजारों की संख्या में वाहन घंटों तक सड़क पर रेंगते नजर आए। ऑफिस से अपने घर लौट रहे नौकरीपेशा लोग, कैब चालक और परिवहन सेवाओं से जुड़े यात्री इस भयंकर जाम में घंटों फंसे रहे। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारों और वाहनों के हार्न के शोर के बीच यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

शुक्रवार की शाम सरहौल बॉर्डर पर उमड़ा वाहनों का सैलाब और यातायात की पूरी विफलता

हर हफ्ते की तरह शुक्रवार का दिन वैसे ही काम के बाद वीकेंड की शुरुआत का होता है, जिसके कारण दिल्ली से गुरुग्राम और नोएडा की ओर जाने वाले ट्रैफिक का दबाव सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा रहता है। लेकिन इस शुक्रवार को स्थिति तब और अधिक विकराल हो गई जब एनएच-48 (NH-48) पर वाहनों का अत्यधिक दबाव अचानक बढ़ गया। सरहौल बॉर्डर पर गाड़ियों की चेकिंग, बैरिकेड्स और वीवीआईपी मूवमेंट या अन्य सुरक्षा कारणों के चलते वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई। देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में गाड़ियों की लंबी लाइनें कई किलोमीटर पीछे दिल्ली की सीमा तक पहुंच गईं। लोगों का कहना था कि उन्हें कुछ मिनटों का सफर तय करने में घंटों का वक्त लग गया।

ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन के नाकाफी इंतजामों पर भड़के वाहन चालक और यात्री

दैनिक यात्रियों और कार चालकों ने इस महाजाम के लिए यातायात पुलिस (Traffic Police) और प्रशासनिक व्यवस्था की सुस्ती को जिम्मेदार ठहराया है। जाम में फंसे कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो और तस्वीरें शेयर करते हुए अपनी भड़ास निकाली। लोगों का आरोप था कि जब हर हफ्ते शुक्रवार को पीक ऑवर्स में ट्रैफिक का दबाव अधिक होता है, तो ट्रैफिक पुलिस पहले से वैकल्पिक रूट या अतिरिक्त बल तैनात क्यों नहीं करती है? सरहौल बॉर्डर पर टोल प्लाजा के पास और यू-टर्न के इर्द-गिर्द बैरिकेडिंग की वजह से गाड़ियां आपस में फंस गईं, जिससे जाम और अधिक गंभीर हो गया। ट्रैफिक कर्मियों को इस विकट स्थिति को संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर उमड़ी भारी भीड़, कैब का किराया आसमान पर

सड़क मार्ग पर लगे इस भयंकर जाम का असर दिल्ली-गुरुग्राम रूट की मेट्रो सेवाओं पर भी साफ तौर पर देखने को मिला। जब सड़कों पर वाहन पूरी तरह से थम गए, तो हजारों लोगों ने अपनी गाड़ियां बीच रास्ते में छोड़कर या कैब रद्द करके मेट्रो स्टेशनों की तरफ रुख किया। इसके चलते सिकंदपुर, एमजी रोड और इफको चौक जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूसरी तरफ, ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर जैसे उबर और ओला के जरिए सफर करने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं क्योंकि जाम के कारण सर्ज प्राइजिंग (Surge Pricing) लागू होने से कैब का किराया सामान्य से तीन से चार गुना तक महंगा हो गया, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

वीकेंड की शुरुआत से पहले दिल्ली-NCR में यातायात प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर इस तरह का महाजाम लगा हो, बल्कि अक्सर बारिश, त्योहारों या शुक्रवार की शाम को ऐसी तस्वीरें आम हो जाती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से दिल्ली-NCR के ट्रैफिक और अर्बन प्लानिंग (Urban Planning) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बॉर्डर के पास कमर्शियल व्हीकल्स के लिए वैकल्पिक बाईपास या स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों को इस तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलने वाली नहीं है। शुक्रवार की शाम का यह महाजाम प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।