हरियाणा शिक्षा विभाग का गजब कारनामा: करनाल में एक दिन में सिर्फ 5 मामलों के वेरिफिकेशन की क्षमता, और भेज दिए 500 केस
हरियाणा के करनाल जिले से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी सुस्ती का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग (Education Department) की तरफ से अजीबोगरीब लापरवाही देखने को मिली है, जहां एक तरफ एक दिन में सिर्फ 5 मामलों की एज वेरिफिकेशन (Age Verification) करने की क्षमता है, वहीं दूसरी तरफ काम का भारी बोझ डालते हुए एक साथ सीधे 500 से ज्यादा केस जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इस कागजी प्रकिया के भारी असंतुलन के बाद से स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच सिरदर्दी बढ़ गई है, जिससे कामकाज पूरी तरह से पटरी से उतरता नजर आ रहा है।
क्षमता से सौ गुना ज्यादा काम का बोझ
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करनाल के संबंधित शिक्षा कार्यालय में संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी है, जिसके चलते वहां एक दिन में अधिकतम पांच आयु सत्यापन मामलों को ही तकनीकी और कानूनी रूप से जांचा जा सकता है। इसके बावजूद उच्च स्तर से एक झटके में 500 पेंडिंग और नए केसों की फाइलें थमा दी गईं। इस भारी-भरकम अंतर के कारण न केवल फाइलों का निपटारा महीनों पीछे चला गया है, बल्कि उन मामलों से जुड़े लोगों को भी अनावश्यक रूप से चक्कर काटने पड़ रहे हैं जिन्हें तुरंत दस्तावेजों के सत्यापन की सख्त जरूरत थी।
प्रशासनिक सुस्ती और सिस्टम पर खड़े हुए सवाल
सरकारी विभागों में इस तरह की लचर कार्यशैली और प्लानिंग की कमी पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि जब जमीनी स्तर पर संसाधनों का आंकलन किए बिना इस तरह के मनमाने फरमान जारी किए जाते हैं, तो उसका खामियाजा आम जनता और जमीनी कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है। करनाल के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजी दस्तावेजों की ऑनलाइन और ऑफलाइन वेरिफिकेशन प्रणाली में सुधार लाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की कितनी ज्यादा जरूरत है।