सोनीपत में गन्ने के नए पेराई सत्र को लेकर प्रशासनिक हलचल हुई तेज
हरियाणा की सहकारी चीनी मिलों और कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रशासनिक स्तर पर बैठकों और दौरों का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में हाल ही में सोनीपत जिले के दौरे पर पहुंचे प्रदेश के प्रमुख कैबिनेट मंत्री ने शुगरफेड (Sugarfed) के उच्चाधिकारियों के साथ एक बेहद अहम और लंबी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी गन्ना पेराई सत्र (Crushing Season) की तैयारियों का जायजा लेना और यह सुनिश्चित करना था कि किसानों को इस सीजन में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सोनीपत के विश्राम गृह या प्रशासनिक भवन में आयोजित इस बैठक में शुगरफेड के प्रबंध निदेशक, स्थानीय चीनी मिलों के महाप्रबंधक और सहकारिता विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से मौजूद रहे। मंत्री ने अधिकारियों के साथ मिल के हर एक प्लांट, मशीनरी की स्थिति और पिछले सत्र के कामकाज की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
समय पर मिलों का संचालन और किसानों को निर्बाध भुगतान सुनिश्चित करने की कवायद
हरियाणा के गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र का समय किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता, क्योंकि इसी दौरान उनकी सालभर की मेहनत का फल उन्हें मिलता है। कैबिनेट मंत्री ने बैठक के दौरान सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया कि आगामी पेराई सत्र की शुरुआत तय समय पर हो जानी चाहिए ताकि किसानों को अपने खेतों में अगली फसल की बुआई करने में कोई देरी न हो। इसके साथ ही, मंत्री ने पिछले पेराई सत्र के दौरान किसानों के बकाया गन्ना भुगतान (Sugarcane Payment) की स्थिति की भी गहन समीक्षा की। अधिकारियों को कड़े शब्दों में यह ताड़ना दी गई कि यदि किसी भी चीनी मिल स्तर पर किसानों का भुगतान लंबित है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर तुरंत क्लियर किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की यह स्पष्ट नीति है कि अन्नदाता किसानों को उनके पसीने की एक-एक पाई का भुगतान समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चीनी मिलों की तकनीकी क्षमता और मेंटेनेंस कार्यों की प्रगति पर चर्चा
गन्ना पेराई सत्र के दौरान मिलों के अचानक खराब होने या तकनीकी खराबी आने से किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें मिल गेट के बाहर लग जाती हैं, जिससे किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इस व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट मंत्री ने सोनीपत समेत राज्य की अन्य सहकारी चीनी मिलों में चल रहे प्री-सीजन मेंटेनेंस (Pre-Season Maintenance) और मरम्मत के कार्यों की एक-एक यूनिट की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही सभी प्लांट और मशीनों का ड्राई रन (Dry Run) पूरा कर लें ताकि सीजन के दौरान मिलें पूरी क्षमता के साथ निर्बाध रूप से चलती रहें। इसके अलावा, मिल परिसरों में किसानों के लिए पीने के पानी, ठहरने की व्यवस्था, कैंटीन और तौल केंद्रों (Weighing Bridges) पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल कांटों व सीसीटीवी कैमरों की पुख्ता व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए।
सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
बैठक के अंत में मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री ने दोहराया कि हरियाणा सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह से समर्पित और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र को लगातार घाटे से उबारकर मुनाफे और आधुनिक तकनीक की ओर ले जाया जा रहा है। चीनी मिलों में केवल चीनी का उत्पादन ही नहीं, बल्कि एथेनॉल प्लांट और बिजली सह-उत्पाद (Co-generation) इकाइयों के जरिए मिलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में किसानों को समय पर गन्ने का सर्वश्रेष्ठ भाव और बोनस मिल सके। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि वे मैदानी स्तर पर किसानों के साथ सीधा संवाद रखें और उनकी हर छोटी-बड़ी समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। सोनीपत में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक से साफ जाहिर होता है कि इस बार का गन्ना पेराई सत्र किसानों के लिए अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और लाभप्रद साबित होने वाला है।