नीतीश के हिजाब कांड पर हरि भूषण ठाकुर बचौल का धाकड़ बयान, विरोधियों को मिर्ची लगना तय
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में पिछले 24 घंटों से एक ही वीडियो की चर्चा है सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का मंच पर एक लेडी डॉक्टर से चेहरा खोलने (हिजाब/मास्क हटाने) के लिए कहना। जहां विपक्ष और सोशल मीडिया इस मुद्दे पर सीएम को घेर रहे हैं, वहीं बीजेपी के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक हरि भूषण ठाकुर 'बचौल' (Hari Bhushan Thakur Bachol) खुलकर नीतीश कुमार के समर्थन में आ गए हैं।
अक्सर अपने बयानों से विवाद खड़ा करने वाले बचौल ने इस बार विपक्ष को ही लपेटे में ले लिया है। उनका कहना है कि इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है।
बचौल ने क्या तर्क दिया?
हरि भूषण ठाकुर बचौल ने अपनी बेबाक शैली में कहा कि मुख्यमंत्री अगर किसी को नियुक्ति पत्र (Job Letter) दे रहे हैं, तो उन्हें यह देखने का पूरा हक है कि वो किसे नौकरी दे रहे हैं।
बचौल ने कहा, "इसमें गलत क्या है? अगर कोई मास्क या नकाब लगाकर खड़ा है, तो पहचान कैसे होगी? सीएम साहब ने सिर्फ इतना चाहा कि चेहरा साफ दिखे। इसे धर्म या हिजाब से जोड़ना बेवकूफी है। यह पहचान (Identity) का मामला है।"
"पर्दा वहां रखो जहाँ ज़रूरत है"
बचौल यहीं नहीं रुके। उन्होंने इशारों-इशारों में कड़ी बात कह दी। उनका कहना था कि जब आप सार्वजनिक जीवन में हैं या कोई सरकारी काम कर रहे हैं, तो चेहरा छुपाने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया के कई इस्लामिक देशों में भी पहचान के लिए चेहरा दिखाना अनिवार्य है, तो बिहार में इतना हंगामा क्यों?
विपक्ष पर साधा निशाना
बचौल ने कहा कि विपक्ष (RJD और कांग्रेस) के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वो सीएम के एक सामान्य इशारे को 'अपमान' बताकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि नीतीश कुमार का मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि संवाद (Communication) को साफ़ रखना था।
माहौल गरम है!
जहां एक तरफ तेजस्वी यादव की पार्टी और कुछ संगठन इसे "नारी सम्मान" और "धार्मिक स्वतंत्रता" पर हमला बता रहे हैं, वहीं बचौल के इस बयान ने एनडीए (NDA) का पक्ष मजबूत करने की कोशिश की है। लेकिन इतना तय है कि बचौल के बोलने के बाद यह विवाद अभी शांत होता नहीं दिख रहा।