Guru Nanak Jayanti 2025: तारीखों का कन्फ्यूजन खत्म, जानिए 4 और 5 नवंबर में से किस दिन है प्रकाश पर्व

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News India Live, Digital Desk : हर साल जब भी कोई बड़ा त्योहार आता है, तो अक्सर उसकी तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन पैदा हो जाती है। ऐसा ही कुछ इस साल सिखों के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक, गुरु नानक जयंती यानी प्रकाश पर्व को लेकर हो रहा है। लोगों में यह कन्फ्यूजन है कि यह त्योहार 4 नवंबर को मनाया जाएगा या 5 नवंबर को।

अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो परेशान न हों। चलिए, इस उलझन को दूर करते हैं और जानते हैं कि इसका कारण क्या है और सही तारीख कौन-सी है।

आखिर यह कन्फ्यूजन है क्यों?

यह सारी उलझन कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि के समय को लेकर है। गुरु नानक जयंती का पर्व हमेशा कार्तिक पूर्णिमा को ही मनाया जाता है। इस साल पंचांग के अनुसार:

  • पूर्णिमा तिथि शुरू हो रही है - 4 नवंबर 2025, मंगलवार की रात 10 बजकर 36 मिनट से।
  • पूर्णिमा तिथि खत्म हो रही है - 5 नवंबर 2025, बुधवार की शाम 06 बजकर 48 मिनट पर।

अब आप देख सकते हैं कि पूर्णिमा की तिथि इन दो तारीखों (4 और 5 नवंबर) में बँटी हुई है। यहीं से सारा कन्फ्यूजन शुरू होता है।

तो फिर सही तारीख कौन-सी है?

इसका जवाब हमारे शास्त्रों में दिए गए एक बहुत ही सीधे और सरल नियम में छिपा है, जिसे 'उदया तिथि' का नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार, कोई भी त्योहार उस दिन मनाया जाता है, जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि मौजूद हो।

चूंकि 4 नवंबर को जब सूर्योदय होगा, तब चतुर्दशी तिथि होगी और 5 नवंबर को जब सूर्योदय होगा, तब पूर्णिमा तिथि होगी। इसलिए, साल 2025 में गुरु नानक जयंती का प्रकाश पर्व 5 नवंबर, बुधवार को ही मनाना शास्त्र के अनुसार सही है।

कैसे मनाया जाता है गुरु परब?

प्रकाश पर्व का जश्न कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है।

  • त्योहार से दो दिन पहले गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ शुरू होता है।
  • एक दिन पहले पंज प्यारों की देखरेख में नगर कीर्तन या भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
  • जयंती के दिन सुबह से लेकर रात तक गुरुद्वारों में शबद-कीर्तन होते हैं, गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को याद किया जाता है और विशाल लंगरों का आयोजन होता है, जहाँ हर कोई एक साथ बैठकर प्रसाद खाता है।

यह त्योहार हमें गुरु नानक देव जी की उन महान शिक्षाओं की याद दिलाता है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं - ईश्वर एक है, और हमें ईमानदारी से मेहनत करते हुए सबके साथ मिल-बाँटकर रहना चाहिए।