लेबनान सीजफायर पर अमेरिका-ईरान के बीच महायुद्ध पाकिस्तान की एक गलती ने दुनिया भर में मचाया बवाल
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे तनाव के बीच लेबनान में सीजफायर को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के राजनयिकों को असमंजस में डाल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में अचानक पाकिस्तान का नाम उछलने से मामला और भी पेचीदा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच अब पाकिस्तान पर यह आरोप लग रहे हैं कि उसने सीजफायर की खबरों को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने में भूमिका निभाई है। इस 'डिप्लोमैटिक कन्फ्यूजन' ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेबनान में शांति की कोशिशें या महज एक अफवाह?
पिछले कुछ घंटों से लेबनान और इजरायल के बीच संभावित संघर्ष विराम (Ceasefire) की खबरें तेजी से वायरल हो रही थीं। जहां एक तरफ अमेरिका का दावा था कि वह शांति बहाली के करीब है, वहीं ईरान समर्थित गुटों की ओर से विरोधाभासी बयान आ रहे थे। इसी बीच पाकिस्तान की ओर से कुछ ऐसी आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आए, जिन्होंने आग में घी डालने का काम किया। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने बिना किसी ठोस पुष्टि के इस संवेदनशील मुद्दे पर दावे कर दिए, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच गलतफहमी और बढ़ गई।
अमेरिका और ईरान के दावों में फंसा पाकिस्तान
व्हाइट हाउस की ओर से लगातार यह संकेत दिए जा रहे थे कि लेबनान में युद्धविराम के लिए बातचीत सही दिशा में है। इसी बीच, पाकिस्तान के आधिकारिक हलकों से कुछ ऐसे संदेश प्रसारित हुए जिनमें ईरान के रुख को लेकर दावे किए गए थे। ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान ने 'बिचौलिया' बनने की कोशिश में तथ्यों के साथ लापरवाही बरती। अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या पाकिस्तान जानबूझकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही गुप्त वार्ताओं में बाधा डाल रहा है या यह उसकी प्रशासनिक अक्षमता का नतीजा है।
क्या पाकिस्तान की 'डिजिटल डिप्लोमेसी' पड़ गई भारी?
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान अपने सोशल मीडिया हैंडल या जल्दबाजी में दिए गए बयानों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा हुआ है। लेबनान सीजफायर को लेकर जो विरोधाभासी दावे पाकिस्तान की तरफ से आए, उसने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच भरोसे की खाई को और चौड़ा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बेवजह की बयानबाजी कर रहा है, जो अब उसके लिए ही मुसीबत बनती जा रही है।
दुनिया के सामने पाकिस्तान की किरकिरी
इस पूरे ड्रामे के बाद लेबनान में जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान की इस हरकत ने न केवल अमेरिका को नाराज किया है, बल्कि उसके पुराने सहयोगी ईरान के साथ भी रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर दी है। एक तरफ जहां दुनिया शांति की राह देख रही है, वहीं पाकिस्तान की इस 'गैर-जिम्मेदाराना' रिपोर्टिंग ने वैश्विक कूटनीति में उसे अलग-थलग करने का काम किया है। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तान सरकार इस कूटनीतिक चूक पर कोई आधिकारिक सफाई पेश करती है।