UP का अब तक का सबसे बड़ा रोड प्रोजेक्ट! गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा पूरब और पश्चिम, समझिए इस महापरियोजना का पूरा प्लान
उत्तर प्रदेश, जिसे अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के नाम से भी जाना जाने लगा है, अपने इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने की तैयारी कर रहा है। यमुना, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की शानदार सफलता के बाद, अब योगी सरकार एक ऐसी महापरियोजना पर काम करने जा रही है जो सही मायनों में प्रदेश की भाग्य रेखा साबित हो सकती है। हम बात कर रहे हैं लगभग 700 किलोमीटर लंबे गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Shamli Expressway) की।
यह सिर्फ एक और सड़क नहीं होगी, बल्कि यह एक ऐसा आर्थिक और सामाजिक गलियारा होगा जो उत्तर प्रदेश के दो बिल्कुल अलग-अलग भौगोलिक और आर्थिक क्षेत्रों - पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश - को सीधे तौर पर एक सूत्र में पिरो देगा। यह एक्सप्रेसवे 22 जिलों से होकर गुजरेगा और प्रदेश के विकास को एक नई, अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।
क्या है गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे और क्यों है यह इतना ख़ास?
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Greenfield Expressway) होगा। इसका मतलब है कि यह पूरी तरह से एक नए रास्ते (एलाइनमेंट) पर बनाया जाएगा, जिसके लिए नई जमीन का अधिग्रहण होगा। यह मौजूदा सड़कों को चौड़ा करके नहीं बनाया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य तेज गति से हो सकेगा और रास्ते में आने वाले शहरों और कस्बों को भी जाम से मुक्ति मिलेगी।
इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका मकसद:
- पूरब और पश्चिम की दूरी खत्म: अभी गोरखपुर से शामली या सहारनपुर तक सड़क मार्ग से जाने में 15 से 16 घंटे का लंबा और थकाऊ समय लगता है। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह दूरी घटकर महज 7 से 8 घंटे रह जाएगी। यह एक क्रांतिकारी बदलाव होगा।
- आर्थिक विकास की नई धुरी: पश्चिमी यूपी जहां अपनी कृषि (खासकर गन्ना) और उद्योग के लिए जाना जाता है, वहीं पूर्वांचल एक बड़ा बाजार और श्रम का स्रोत है। यह एक्सप्रेसवे इन दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को बेहद आसान बना देगा।
एक्सप्रेसवे की मुख्य विशेषताएं और रूट
यह महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना होगा, जिसकी कई विशेषताएं होंगी:
- लंबाई और चौड़ाई: लगभग 700 किलोमीटर लंबा और 6-लेन चौड़ा होगा, जिसे भविष्य में 8-लेन तक बढ़ाया जा सकेगा।
- रूट: यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शुरू होकर संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर से होते हुए शामली तक जाएगा। यह कुल 22 जिलों को सीधे या परोक्ष रूप से जोड़ेगा।
- कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे रास्ते में पड़ने वाले अन्य कई राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा, जिससे प्रदेश के किसी भी कोने तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
इस एक्सप्रेसवे से आपकी जिंदगी पर क्या होगा असर?
यह मेगा प्रोजेक्ट सिर्फ उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन में भी बड़े और सकारात्मक बदलाव लाएगा:
- किसानों को फायदा: पूर्वांचल के किसान अपनी सब्जियां, फल और अन्य उपज को बहुत तेजी से पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे।
- रोजगार के अवसर: एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके बन जाने के बाद, इसके किनारे औद्योगिक गलियारे, लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल, और नए टाउनशिप विकसित होंगे, जिससे लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
- रियल एस्टेट को पंख: जिन 22 जिलों से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां जमीन की कीमतों में उछाल आना तय है और रियल एस्टेट सेक्टर में जबरदस्त निवेश देखने को मिलेगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: गोरखपुर ( गोरखनाथ मंदिर) से लेकर पश्चिमी यूपी के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
- समय और ईंधन की बचत: तेज और सुगम यात्रा से लोगों का कीमती समय बचेगा और गाड़ियों के ईंधन की खपत भी कम होगी।
फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण का काम शुरू किया जाएगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट का एक रास्ता नहीं, बल्कि 'नए उत्तर प्रदेश' के 'आत्मनिर्भर' भविष्य की ओर ले जाने वाला एक स्वर्णिम पथ साबित होगा।