Google AI Flood Forecasting : 50 लाख समाचार लेखों से सीखा बाढ़ का पूर्वानुमान, अब फ्लैश फ्लड और क्लाउडबर्स्ट की मिलेगी चेतावनी
News India Live, Digital Desk: प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) और बादल फटने (Cloudburst) की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए गूगल ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। गूगल ने एक नया AI-संचालित बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल लॉन्च किया है, जिसे 50 लाख से अधिक समाचार लेखों और ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित (Train) किया गया है। यह तकनीक अब धारली (उत्तराखंड) जैसी संवेदनशील जगहों पर भी सटीक चेतावनी देने में सक्षम है।
कैसे काम करता है यह AI मॉडल?
पारंपरिक मॉडल अक्सर केवल वर्षा और नदी के स्तर के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं, लेकिन गूगल का यह नया मॉडल 'मल्टी-मोडल' दृष्टिकोण अपनाता है:
समाचार लेखों का विश्लेषण: मॉडल ने पिछले कई दशकों के 50 लाख से अधिक समाचार लेखों को प्रोसेस किया है। इससे AI को यह समझने में मदद मिली कि अतीत में किन परिस्थितियों (जैसे अचानक तापमान बढ़ना या तेज बारिश) के बाद बाढ़ आई थी।
रियल-टाइम डेटा: यह सैटेलाइट इमेजरी, मौसम के पूर्वानुमान और स्थानीय सेंसर डेटा को जोड़कर एक 'प्रेडिक्टिव मैप' तैयार करता है।
फ्लैश फ्लड वार्निंग: सामान्य बाढ़ के विपरीत, फ्लैश फ्लड में तैयारी का समय बहुत कम होता है। यह मॉडल अब 7 दिन पहले तक बाढ़ का पूर्वानुमान लगा सकता है, जो पहले केवल 2-3 दिन था।
धारली क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाओं में मिलेगी मदद
उत्तराखंड के धारली और ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएं आम हैं। गूगल की यह तकनीक इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकती है:
अति-स्थानीय चेतावनी (Hyper-local Alerts): यह बड़े शहरों के बजाय छोटे गांवों और घाटियों के स्तर पर चेतावनी जारी कर सकता है।
एंड्रॉइड अलर्ट: गूगल सीधे एंड्रॉइड फोन पर नोटिफिकेशन और सर्च के जरिए स्थानीय लोगों को अलर्ट भेजता है, जिससे बचाव कार्य के लिए महत्वपूर्ण समय मिल जाता है।
बाढ़ पूर्वानुमान (Flood Hub) की मुख्य विशेषताएं
वैश्विक कवरेज: यह सेवा भारत सहित 80 से अधिक देशों में उपलब्ध है।
निशुल्क पहुंच: कोई भी व्यक्ति गूगल के 'Flood Hub' प्लेटफॉर्म पर जाकर अपने क्षेत्र का जोखिम देख सकता है।
स्वदेशी भाषाएं: भारत में यह हिंदी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में अलर्ट जारी करता है।