दिल्ली-गुड़गांव वालों के लिए खुशखबरी! डेढ़ घंटे का सफ़र अब सिर्फ 20 मिनट में होगा पूरा, बन रहा है नया एक्सप्रेसवे
अगर आप भी दिल्ली और गुरुग्राम के बीच रोजाना लगने वाले भयंकर ट्रैफिक जाम से परेशान हो चुके हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिससे आपकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है। दिल्ली के एम्स (AIIMS) से महिपालपुर होते हुए गुरुग्राम तक एक नया एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी शुरू हो गई है।
इस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर काम भी शुरू हो चुका है, जिसके बाद यह तय होगा कि यह एक्सप्रेसवे कहाँ जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) और कहाँ ऊपर (एलिवेटेड) बनाया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद जो सफर अभी डेढ़ से दो घंटे का है, वह सिमटकर सिर्फ 20 से 25 मिनट का रह जाएगा।
क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट?
- लंबाई: यह एक्सप्रेसवे लगभग 35 किलोमीटर लंबा और पूरी तरह से सिग्नल-फ्री होगा।
- लागत: इस पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
- लेन: यह एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा, जिसमें अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों हिस्से शामिल होंगे।
- रूट: यह दिल्ली में एम्स से शुरू होकर INA, वसंत विहार, वसंत कुंज होते हुए महिपालपुर तक जाएगा और वहां से गुरुग्राम के घाटा गांव के पास गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जुड़ जाएगा।
कैसे बचेगा आपका समय?
अभी पीक आवर्स में एम्स से गुरुग्राम के सिरहौल बॉर्डर तक पहुंचने में कम से कम डेढ़ घंटा लगता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के बनने से आप यह दूरी सिर्फ 20-25 मिनट में तय कर पाएंगे। यह एक्सप्रेसवे सीधा गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर महिपालपुर और सिरहौल बॉर्डर के बीच लगने वाले कुख्यात जाम से भारी राहत मिलेगी।
सिर्फ दिल्ली-गुरुग्राम ही नहीं, इन लोगों को भी होगा फायदा
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी का एक जाल बिछाएगा।
- यह आगे चलकर दक्षिणी पेरिफेरल रोड (SPR), गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और गुरुग्राम-सोहना हाईवे से जुड़ जाएगा।
- यही नहीं, यह आपको सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी कनेक्ट करेगा।
- इसका मतलब है कि अब फरीदाबाद, पलवल, जयपुर, दौसा या मुंबई जाने वाले लोगों को गुरुग्राम के जाम में फंसने की जरूरत नहीं होगी। वे महिपालपुर से सीधे इस नए रास्ते का इस्तेमाल कर पाएंगे।
इससे न सिर्फ लोगों का कीमती समय बचेगा, बल्कि गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी काफी हद तक कम होगा। यह प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा।