सोमनाथ मंदिर जाना पिछड़ापन था? मोदी ने नेहरू की सोच पर किया अब तक का सबसे तीखा हमला

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News India Live, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों को पलटते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सोच पर सवाल खड़े किए हैं। मौका था सोमनाथ मंदिर से जुड़े एक वीडियो "सोमनाथ: एक अनंत यात्रा" (1000 Years Journey) को शेयर करने का। इस दौरान पीएम मोदी ने बिना लाग-लपेट के कहा कि आजादी के तुरंत बाद कुछ बड़े नेताओं ने देश की संस्कृति को अपनाने के बजाय उससे दूरी बना ली थी।

"मंदिर जाने को मानते थे पिछड़ापन"
पीएम मोदी ने किसी का नाम लिए बिना, लेकिन साफ़ इशारा करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद एक ऐसा दौर था जब अपने ही धर्म और संस्कृति पर बात करना या मंदिरों के पुनर्निर्माण से जुड़ना "पिछड़ापन" (Regressive) माना जाता था। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस समय के बड़े नेता (इशारा नेहरू की तरफ) सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन से खुश नहीं थे।

मोदी ने कहा कि हमारा देश सदियों से अपनी आस्था के बल पर खड़ा है, लेकिन उस समय की सरकारें अपनी ही विरासत को "दकियानूसी" मानकर उसे किनारे करने में लगी थीं। उन्हें लगता था कि आधुनिक होने का मतलब अपनी जड़ों को काट देना है।

राजेंद्र बाबू और सरदार पटेल की तारीफ
जहां एक तरफ मोदी ने नेहरू की आलोचना की, वहीं दूसरी तरफ देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जमकर तारीफ की। मोदी ने कहा कि यह सरदार पटेल का दृढ़ संकल्प ही था कि खंडहर हो चुका सोमनाथ मंदिर आज फिर से शान से खड़ा है।

उन्होंने उस किस्से का भी जिक्र किया जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में जाने वाले थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे। इसके बावजूद, राजेंद्र बाबू वहां गए और उन्होंने कहा था कि "भारत की संस्कृति कभी नहीं मिट सकती।" पीएम मोदी ने कहा कि आज हम उसी गौरव को वापस ला रहे हैं जिसे भुलाने की कोशिश की गई थी।

आज बदल रहा है नजरिया
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अब समय बदल गया है। आज का भारत अपनी टेक्नोलॉजी पर भी गर्व करता है और अपनी संस्कृति पर भी। उन्होंने सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए वीडियो की तारीफ करते हुए कहा कि हर भारतीय को यह जानना चाहिए कि इस मंदिर ने कितने हमले सहे, कितनी बार इसे तोड़ा गया, लेकिन आस्था के आगे अत्याचार कभी जीत नहीं पाया।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार विकास के साथ-साथ 'विरासत' को भी उतना ही महत्व देगी, चाहे अतीत में इसे लेकर कितनी भी राजनीति क्यों न हुई हो।