Goat Farming 2026: कम लागत में शुरू करें 'एटीएम ऑफ विलेज', सरकार दे रही है 50% तक सब्सिडी
लखनऊ/नई दिल्ली। साल 2026 में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए Goat Farming (बकरी पालन) एक 'मनी मेकिंग मशीन' बनकर उभरा है। इसे 'गरीब की गाय' या 'गांव का एटीएम' भी कहा जाता है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर इसे कभी भी बेचकर नकद पैसा कमाया जा सकता है। कम जगह, कम पूंजी और न्यूनतम जोखिम के कारण आज का युवा और महिलाएं इस बिजनेस को एक प्रोफेशनल स्टार्टअप की तरह अपना रहे हैं। 2026 की नई सरकारी नीतियां और डिजिटल बाजार ने इस पारंपरिक व्यवसाय को एक आधुनिक लाभकारी मॉडल में बदल दिया है।
सरकारी सब्सिडी और लोन: 2026 में निवेश हुआ और भी आसान
सरकार बकरी पालन को स्वरोजगार का मुख्य जरिया मान रही है। Goat Farming Loan 2026 के तहत नाबार्ड (NABARD) और पशुपालन विभाग द्वारा भारी वित्तीय सहायता दी जा रही है।
सब्सिडी का गणित: सामान्य वर्ग के लिए 25% से 33% और एससी/एसटी/महिलाओं के लिए 50% तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
डिजिटल आवेदन: अब आप 'पशु सखी' पोर्टल या सरकारी वेबसाइटों के जरिए सीधे घर बैठे लोन और सब्सिडी के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
लोन की सुविधा: एसबीआई (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शेड निर्माण और बकरियों की खरीद के लिए ₹5 लाख से ₹25 लाख तक का लोन प्रदान कर रहे हैं।
मुनाफे वाली नस्लें और शुरुआती निवेश योजना
सफलता की पहली सीढ़ी है सही नस्ल का चुनाव। भारत की जलवायु के हिसाब से 2026 में ये 4 नस्लें सबसे ज्यादा मांग में हैं:
सिरोही (Sirohi): मांस उत्पादन के लिए बेहतरीन और राजस्थान-यूपी के लिए बेस्ट।
बरबरी (Barbari): छोटे कद की नस्ल, जो कम जगह में आसानी से पल जाती है।
जमुनापारी (Jamunapari): दूध और मांस दोनों के लिए दुनिया भर में मशहूर।
बीटल (Beetal): पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों में तेजी से वजन बढ़ाने वाली नस्ल।
निवेश प्लान: यदि आप 20 बकरियों और 1 बकरे से शुरुआत करते हैं, तो कुल लागत लगभग ₹2 लाख से ₹3 लाख आती है। सरकारी सब्सिडी के बाद आपकी वास्तविक पूंजी केवल ₹1.5 लाख के आसपास रह जाती है।
देखभाल और वैज्ञानिक स्वास्थ्य प्रबंधन
2026 में Scientific Goat Farming पर जोर दिया जा रहा है। अब केवल चराने के भरोसे नहीं, बल्कि 'स्टाल फीडिंग' (Stall Feeding) के जरिए ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है।
संतुलित आहार: हरा चारा, भूसा और 'मिनरल मिक्स' का सही मिश्रण बकरियों का वजन तेजी से बढ़ाता है।
स्वास्थ्य सुरक्षा: समय पर टीकाकरण (Vaccination) और हर तीन महीने में डी-वॉर्मिंग (पेट के कीड़े मारना) अनिवार्य है।
पशु मोबाइल यूनिट: सरकार द्वारा शुरू की गई '1962' हेल्पलाइन सेवा के जरिए अब पशु चिकित्सक सीधे आपके फार्म पर इलाज के लिए उपलब्ध हैं।
कमाई और मार्केटिंग: कहां और कैसे बेचें?
बकरी पालन में केवल मांस ही नहीं, बल्कि दूध और खाद से भी कमाई होती है।
त्योहारों का सीजन: ईद और अन्य त्योहारों पर एक स्वस्थ बकरा ₹20,000 से ₹50,000 तक में बिकता है।
डिजिटल मार्केटिंग: 2026 में 'मंडी' के साथ-साथ फेसबुक मार्केटप्लेस और 'एग्री-टेक' ऐप्स के जरिए सीधे ग्राहकों को बेचकर आप बिचौलियों का कमीशन बचा सकते हैं।
उप-उत्पाद: बकरी की खाद (Organic Fertilizer) नर्सरी और जैविक खेती करने वाले किसानों को महंगे दामों पर बेची जा सकती है।