Gemology : माणिक पहनने की सही विधि क्या है? एक छोटी सी गलती फायदे को बदल सकती है नुकसान में

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News India Live, Digital Desk : Gemology : रत्न शास्त्र एक ऐसी दुनिया है, जहां माना जाता है कि सही रत्न सही समय पर धारण किया जाए, तो इंसान की किस्मत बदल सकती है। इन रत्नों में एक ऐसा रत्न है जिसे 'माणिक' (Ruby) के नाम से जाना जाता है। इसे रत्नों का राजा भी कहा जाता है क्योंकि इसका सीधा संबंध ग्रहों के राजा सूर्य देव से है। सूर्य को ज्योतिष में आत्मा, पिता, मान-सम्मान, सफलता और ऊर्जा का कारक माना गया है।

जिस तरह सूर्य के आते ही अंधकार दूर हो जाता है, उसी तरह माना जाता है कि माणिक पहनने से व्यक्ति के जीवन से निराशा और असफलता के बादल छंट जाते हैं। लेकिन यह शक्तिशाली रत्न हर किसी के लिए नहीं बना है। इसे गलत तरीके से या गलत व्यक्ति द्वारा धारण कर लेने पर फायदे की जगह भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

आइए, जानते हैं कि माणिक किसे पहनना चाहिए, किसे नहीं, और इसे धारण करने की सही विधि क्या है।

किसे पहनना चाहिए माणिक रत्न?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माणिक कुछ खास राशियों के लिए अमृत के समान फल देता है:

  1. सिंह राशि (Leo): सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है, इसलिए इस राशि के लोगों के लिए माणिक उनका जीवन रत्न (लाइफ स्टोन) है। इसे पहनने से उनका स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और भाग्य हमेशा प्रबल रहता है।
  2. मेष (Aries), वृश्चिक (Scorpio) और धनु (Sagittarius) राशि: इन राशियों की सूर्य के साथ मित्रता है। अगर इन राशियों के जातकों की कुंडली में सूर्य अच्छी स्थिति में है, तो वे ज्योतिषीय सलाह के बाद माणिक पहन सकते हैं। यह उनके करियर, शिक्षा और मान-सम्मान में वृद्धि करता है।
  3. वो लोग जिन्हें लीडर बनना है: अगर आप प्रशासनिक सेवा, राजनीति, मैनेजमेंट या किसी ऐसे क्षेत्र में हैं जहां आपको लोगों को नेतृत्व करना पड़ता है, तो माणिक आपकी लीडरशिप क्वालिटी को निखारता है।
  4. आत्मविश्वास की कमी: अगर आपमें आत्मविश्वास की कमी है, आप लोगों के सामने अपनी बात नहीं रख पाते या हमेशा एक अनजाना सा डर महसूस करते हैं, तो माणिक आपको आंतरिक शक्ति और साहस प्रदान करता है।

भूलकर भी ये लोग न पहनें माणिक

जिस तरह माणिक कुछ लोगों को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकता है, उसी तरह कुछ लोगों के लिए यह बेहद हानिकारक साबित हो सकता है:

  • मकर (Capricorn) और कुंभ (Aquarius) राशि: इन दोनों राशियों के स्वामी शनि देव हैं। ज्योतिष में सूर्य और शनि को एक-दूसरे का शत्रु माना गया है। इसलिए इन राशि वालों को माणिक कभी नहीं पहनना चाहिए, वरना जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
  • कन्या, तुला और मिथुन राशि: इन राशि के जातकों को भी माणिक पहनने से बचना चाहिए, जब तक कि किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी द्वारा कुंडली का गहन विश्लेषण न किया गया हो।
  • अगर कुंडली में सूर्य नीच का (तुला राशि में) या कमजोर स्थिति में हो, तो बिना ज्योतिषीय सलाह के माणिक धारण करना नुकसानदायक हो सकता है।
  • हीरा (Diamond) और नीलम (Blue Sapphire) के साथ माणिक कभी नहीं पहनना चाहिए।

माणिक पहनने के जबरदस्त फायदे

  • सफलता और सम्मान: यह रत्न पहनने वाले को समाज में मान-सम्मान और प्रसिद्धि दिलाता है। सरकारी नौकरी या राजनीति में सफलता के लिए यह बहुत सहायक माना जाता है।
  • सेहत के लिए वरदान: यह हृदय (Heart), हड्डियों (Bones) और आंखों (Eyes) से जुड़ी समस्याओं में राहत पहुंचाता है। यह शरीर में रक्त संचार को भी बेहतर बनाता है।
  • पिता से रिश्ते मजबूत: चूँकि सूर्य पिता का कारक है, माणिक पहनने से पिता के साथ संबंध मधुर होते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: यह नकारात्मक विचारों को दूर कर व्यक्ति को पॉजिटिव और ऊर्जावान बनाता है।

माणिक धारण करने की सही और पूरी विधि

माणिक एक कीमती और शक्तिशाली रत्न है, इसे किसी भी दिन ऐसे ही नहीं पहना जा सकता। इसकी पूरी विधि इस प्रकार है:

  1. वजन: माणिक का वजन व्यक्ति के शरीर के वजन के अनुसार तय होता है। सामान्य तौर पर, इसे 5 से 7 रत्ती का पहनना चाहिए।
  2. धातु: माणिक को सोने (Gold) या तांबे (Copper) की अंगूठी में पहनना सबसे उत्तम होता है।
  3. दिन और समय: इसे रविवार (Sunday) के दिन, शुक्ल पक्ष में सुबह स्नान के बाद सूर्योदय के एक घंटे के भीतर पहनना चाहिए।
  4. कौन सी उंगली: इसे सीधे हाथ की अनामिका उंगली (Ring Finger) में धारण किया जाता है।
  5. शुद्धिकरण: पहनने से पहले अंगूठी को गंगाजल या कच्चे दूध में डुबोकर रखें ताकि वह शुद्ध हो जाए।
  6. प्राण प्रतिष्ठा: इसके बाद अंगूठी को मंदिर में रखकर सूर्य देव का ध्यान करें और सूर्य के बीज मंत्र "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का 108 बार जाप करें। इसके बाद इसे धारण करें।

आखिरी सलाह: माणिक एक बेहद प्रभावशाली रत्न है। इसे पहनने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण जरूर करवाएं, क्योंकि वही बता सकते हैं कि यह रत्न आपके लिए शुभ है या अशुभ।