Garuda Purana : घर में किसी की मृत्यु के बाद क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? जानें इसके पीछे का गूढ़ रहस्य और धार्मिक कारण
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद के 13 दिनों का समय बहुत संवेदनशील माना जाता है। गरुड़ पुराण (Garuda Purana) के अनुसार, जब घर में किसी सदस्य का निधन होता है, तो उस घर में चूल्हा जलाना वर्जित माना जाता है। अक्सर लोग इसे केवल एक पुरानी परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे गहरे धार्मिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए जानते हैं कि मृत्यु के बाद घर की रसोई क्यों ठंडी रखी जाती है।
1. दिवंगत आत्मा का घर के प्रति मोह गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद भी आत्मा लगभग 13 दिनों तक अपने परिवार के बीच ही रहती है। वह अपने परिजनों को शोक में देखकर दुखी होती है। ऐसी मान्यता है कि यदि घर में भोजन पकता है और उसकी सुगंध फैलती है, तो आत्मा का सांसारिक मोह और बढ़ जाता है, जो उसकी आगे की यात्रा (परलोक गमन) में बाधा उत्पन्न करता है।
2. शोक व्यक्त करने का तरीका घर में चूल्हा न जलना गहरा शोक प्रकट करने का एक माध्यम है। जिस घर में मातम हो, वहां अन्न पकाना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि उस दिन रिश्तेदार या पड़ोसी बाहर से सादा भोजन लाते हैं। यह परंपरा समाज की एकजुटता को भी दर्शाती है कि दुख की घड़ी में पूरा समुदाय पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
3. गरुण पुराण के कड़े नियम शास्त्रों के अनुसार, जब तक मृतक का दाह संस्कार नहीं हो जाता, तब तक घर को 'अशुद्ध' (सूतक) माना जाता है। दाह संस्कार के बाद भी, घर में सात्विक माहौल बनाए रखने के लिए चूल्हा नहीं जलाया जाता। गरुण पुराण कहता है कि इन दिनों में चूल्हा जलाने से मृतक की आत्मा को कष्ट पहुँच सकता है और उसे शांति नहीं मिलती।
4. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण मनोवैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो जिस घर में मृत्यु हुई हो, वहां के सदस्य गहरे सदमे और मानसिक तनाव में होते हैं। ऐसी स्थिति में भोजन बनाने जैसे घरेलू कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना संभव नहीं होता। यह नियम परिवार को अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने और शोक मनाने के लिए समय प्रदान करता है।
सूतक काल में क्या खाएं? सूतक के दौरान आमतौर पर अत्यंत सादा और बिना लहसुन-प्याज का भोजन किया जाता है। कई जगहों पर केवल एक समय भोजन करने का नियम भी है। जब तक 'शुद्धिकरण' (जैसे दसवां या तेरहवीं) नहीं हो जाता, तब तक घर में उत्सव जैसा भोजन या पकवान बनाना वर्जित है।