दोस्ती धरी रह गई इंडोनेशिया ने ठुकराया पाकिस्तान का JF-17, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पर आया दिल

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News India Live, Digital Desk:  दुनिया में समीकरण कितनी तेजी से बदल रहे हैं, इसका ताज़ा उदाहरण अभी-अभी देखने को मिला है। अक्सर हम सुनते थे कि पाकिस्तान 'मुस्लिम ब्रदरहुड' या इस्लामिक देशों के साथ दोस्ती की दुहाई देता है, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा की आती है, तो रिश्ते-नाते सब पीछे छूट जाते हैं। दुनिया के सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ा दी है और भारत को मुस्कुराने का मौका दे दिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंडोनेशिया अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाना चाहता है। इसके लिए उसे लड़ाकू विमानों की तलाश थी। ऐसे मौके पर चीन और पाकिस्तान ने सोचा कि यह तो शानदार अवसर है। उन्होंने अपनी साझी पेशकश यानी JF-17 थंडर फाइटर जेट को इंडोनेशिया को बेचने की पूरी कोशिश की। पाकिस्तान को लगा कि एक मुस्लिम देश होने के नाते इंडोनेशिया उससे ही हथियार खरीदेगा।

लेकिन इंडोनेशिया ने साफ कर दिया कि आज के दौर में भावनाएं नहीं, 'क्वालिटी' बोलती है।

चीन-पाक का 'सस्ता' विकल्प रिजेक्ट

इंडोनेशिया ने JF-17 विमानों को सिरे से नकार दिया। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो इन चीनी-पाकिस्तानी विमानों की तकनीक और क्षमता को लेकर कई देशों में सवाल उठते रहे हैं। इंडोनेशिया ने इसके बजाय फ्रांस के राफेल (Rafale) विमानों और अमेरिका के F-15EX पर भरोसा जताया है। यह वही राफेल है जो आज भारतीय वायुसेना की शान है। यानी इंडोनेशिया ने बता दिया कि उसे 'सस्ता और कामचलाऊ' नहीं, बल्कि 'दमदार और टिकाऊ' हथियार चाहिए।

भारत के लिए क्यों है गर्व की बात?

असली खबर तो अब है! लड़ाकू विमानों के साथ-साथ इंडोनेशिया की नजर दुनिया की सबसे तेज और खतरनाक मिसाइल पर है—जी हां, अपनी 'ब्रह्मोस' (BrahMos) मिसाइल। खबरें आ रही हैं कि फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने के बहुत करीब है।

सोचिए, एक तरफ पाकिस्तान है जिसके विमानों को कोई खरीदार नहीं मिल रहा, और दूसरी तरफ भारत है जिसकी टेक्नोलॉजी (ब्रह्मोस) खरीदने के लिए दुनिया लाइन में लगी है। यह 'मेक इन इंडिया' की बहुत बड़ी जीत है।

रणनीति का नया खेल

इंडोनेशिया का यह कदम सिर्फ एक खरीददारी नहीं है, बल्कि चीन के लिए एक कड़ा संदेश भी है। दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी से इंडोनेशिया भी परेशान है। ऐसे में भारत के साथ रक्षा सौदे करना इस क्षेत्र में शक्ति का संतुलन (Balance of Power) बनाए रखने का काम करेगा।

कुल मिलाकर बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपकी साख आपके काम से बनती है, कोरे दावों से नहीं। भारत की डिफेंस इंडस्ट्री ने यह साबित कर दिया है कि हम दुनिया के बेस्ट प्रोडक्ट्स को टक्कर दे सकते हैं।