बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का 'विस्तार' शुरू, ₹4000 करोड़ से बनेगा चित्रकूट-प्रयागराज लिंक एक्सप्रेसवे, जानें पूरा रूट
'एक्सप्रेसवे प्रदेश' उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी में एक और सुनहरा पन्ना जुड़ने जा रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की सफलता के बाद, योगी सरकार ने अब इसके विस्तार की एक महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दे दी है, जो न केवल बुंदेलखंड क्षेत्र का कायापलट करेगी, बल्कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाएगी।
सरकार 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से चित्रकूट से प्रयागराज को जोड़ने वाले एक नए 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा की है। यह एक्सप्रेसवे असल में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का 'फेज-2' या विस्तार होगा, जो भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट को सीधे संगम नगरी प्रयागराज और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) से जोड़ देगा। यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि आस्था का एक नया 'महामार्ग' होगा।
क्यों है यह 'आस्था का एक्सप्रेसवे' इतना ख़ास?
मौजूदा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, जो चित्रकूट को इटावा के रास्ते आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ता है चित्रकूट की दिल्ली और आगरा से तो दूरी कम कर दी, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों - प्रयागराज और वाराणसी - से इसकी सीधी कनेक्टिविटी अभी भी नहीं थी।
इस नए लिंक एक्सप्रेसवे का मुख्य उद्देश्य इसी खाई को पाटना है।
- आध्यात्मिक त्रिकोण (Spiritual Triangle) होगा पूरा: इसके बन जाने से राम की तपोभूमि चित्रकूट, संगम नगरी प्रयागराज, और शिव की नगरी काशी (वाराणसी) का एक आध्यात्मिक त्रिकोण पूरा हो जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए इन तीनों महान तीर्थों की यात्रा करना बेहद सुगम और तेज हो जाएगा।
- ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट: यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक नए रास्ते (एलाइनमेंट) पर बनाया जाएगा, जिसके लिए नई जमीन का अधिग्रहण होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह सबसे सीधे और सबसे तेज रूट पर बने।
क्या होगा एक्सप्रेसवे का रूट और मुख्य विशेषताएं?
यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) की देखरेख में पूरा किया जाएगा।
- लंबाई और चौड़ाई: यह लिंक एक्सप्रेसवे लगभग 120-130 किलोमीटर लंबा और 4-लेन चौड़ा होगा, जिसे भविष्य में 6-लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान होगा।
- रूट: यह एक्सप्रेसवे चित्रकूट जिले में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर से शुरू होगा और प्रयागराज में लखनऊ-प्रयागराज हाईवे और प्रयागराज-वाराणसी हाईवे (NH-19) से जाकर जुड़ेगा। यह मुख्य रूप से चित्रकूट, बांदा और प्रयागराज जिलों से होकर गुजरेगा।
इस महापरियोजना से क्या-क्या बदलेगा?
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास का एक नया इंजन साबित होगा:
1. यात्रा के समय में भारी कमी:
- अभी चित्रकूट से प्रयागराज तक सड़क मार्ग से जाने में 4 से 5 घंटे लगते हैं। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर घटकर मात्र 2 से 2.5 घंटे का रह जाएगा।
2. बुंदेलखंड का आर्थिक कायापलट:
- यह एक्सप्रेसवे पिछड़े माने जाने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र को सीधे प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ देगा। इससे क्षेत्र में नए निवेश और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
3. रोजगार के नए अवसर:
- एक्सप्रेसवे के निर्माण से लेकर इसके किनारे बनने वाले होटल, रेस्टोरेंट, औद्योगिक क्लस्टर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
4. रियल एस्टेट और पर्यटन में उछाल:
- चित्रकूट और प्रयागराज के बीच के इलाकों में रियल एस्टेट की कीमतों में जबरदस्त उछाल आएगा। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन उद्योग को भी पंख लगेंगे, जिससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी।
फिलहाल, इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह एक्सप्रेसवे न केवल ईंट-पत्थर का एक रास्ता होगा, बल्कि यह आस्था, विकास और समृद्धि को जोड़ने वाला एक सेतु भी साबित होगा।