बराबर मैच फीस, फिर भी वर्ल्ड कप विजेता महिला क्रिकेटरों की कमाई पुरुषों का सिर्फ 10% क्यों? जानिए पूरा सच
News India Live, Digital Desk: हाल ही में जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने अपना पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीता, तो पूरे देश में जश्न का माहौल था।हमारी बेटियों ने वो कर दिखाया था जो एक सपना सा लगता था। इस ऐतिहासिक जीत ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है जो सालों से चली आ रही है - जब प्रदर्शन में कोई कमी नहीं, तो कमाई में इतना बड़ा अंतर क्यों?
साल 2022 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। उसने ऐलान किया कि अब से महिला और पुरुष क्रिकेटरों को बराबर मैच फीस मिलेगी। यानी, चाहे विराट कोहली खेलें या स्मृति मंधाना, दोनों को एक टेस्ट मैच के लिए 15 लाख, वनडे के लिए 6 लाख और टी20 के लिए 3 लाख रुपये मिलेंगे। यह लैंगिक समानता की दिशा में एक शानदार कदम था, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है। असली और चौंकाने वाला अंतर छिपा है BCCI के सालाना कॉन्ट्रैक्ट्स में।
कहां है असली 'खेल'?
मैच फीस तो बराबर हो गई, लेकिन खिलाड़ियों की असली कमाई का बड़ा हिस्सा उनकी सालाना रिटेनरशिप फीस यानी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से आता है। यहीं पर पुरुष और महिला खिलाड़ियों की कमाई में जमीन-आसमान का फर्क साफ नजर आता है।
पुरुष क्रिकेटरों के सालाना कॉन्ट्रैक्ट की श्रेणियां:
- ग्रेड A+: 7 करोड़ रुपये (जैसे- रोहित शर्मा, विराट कोहली
- ग्रेड A: 5 करोड़ रुपये
- ग्रेड B: 3 करोड़ रुपये
- ग्रेड C: 1 करोड़ रुपये
महिला क्रिकेटरों के सालाना कॉन्ट्रैक्ट की श्रेणियां:
- ग्रेड A: 50 लाख रुपये (जैसे- हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना)
- ग्रेड B: 30 लाख रुपये
- ग्रेड C: 10 लाख रुपये
जब आंकड़े बोलते हैं
आंकड़ों का यह खेल ही सारी कहानी बयां कर देता है:
- पुरुष टीम के सबसे निचले यानी ग्रेड C के खिलाड़ी को सालाना 1 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो महिला टीम की टॉप ग्रेड (A) की खिलाड़ी (50 लाख रुपये) से ठीक दोगुना है।
- पुरुष टीम के टॉप ग्रेड (A+) खिलाड़ी की कमाई (7 करोड़ रुपये), महिला टीम की टॉप ग्रेड की खिलाड़ी (50 लाख रुपये) से 14 गुना ज्यादा है।
- चौंकाने वाली बात यह है कि महिला क्रिकेट में तो 'A+' जैसा कोई ग्रेड है ही नहीं।
यह खाई साफ दिखाती है कि भले ही मैदान पर हर एक रन और विकेट के लिए बराबर फीस मिलती हो, लेकिन साल भर खेल को अपना जीवन समर्पित करने के लिए मिलने वाले मेहनताने में बहुत बड़ा अंतर है। वर्ल्ड कप जैसी ऐतिहासिक जीत के बाद यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि आखिर हमारी विश्व विजेता टीम को वह आर्थिक सम्मान कब मिलेगा, जिसकी वे हकदार हैं? BCCI ने समान मैच फीस देकर एक अच्छी शुरुआत जरूर की थी, लेकिन असली बराबरी तब आएगी जब सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के इस फासले को भी मिटाया जाएगा।