दूल्हा भी नहीं रुक पाया! यूपी में शादी के मंडप में मची 'चाऊमीन-वड़े' की ऐसी लूट, वीडियो देख लोग बोले- 'गजब बेइज्जती है'

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शादी का खाना और हम हिंदुस्तानी: हमारे देश में शादी चाहे किसी की भी हो, असली फोकस अक्सर 'दूल्हा-दुल्हन' पर कम और 'खाने के स्टॉल' पर ज्यादा होता है। लेकिन यूपी के हमीरपुर (Hamirpur) से जो नजारा सामने आया है, उसे देखकर आप अपना सिर पकड़ लेंगे। यहां "पहले आओ-पहले पाओ" नहीं, बल्कि "जो छीना-झपटी में जीत गया, खाना उसका" वाला सीन देखने को मिला।

मामला इतना मजेदार (और थोड़ा डरावना) है कि इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। आइये बताते हैं कि आखिर वहां हुआ क्या।

383 जोड़े और 'आलू-वड़ा' की जंग

दरअसल, हमीरपुर के राठ इलाके में स्वामी ब्रह्मानंद खेल मैदान में 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन' चल रहा था। एक साथ 383 जोड़ों की शादी हो रही थी, माहौल खुशियों से भरा था। बैंड-बाजा बज रहा था, रस्में हो रही थीं।

लेकिन जैसे ही शादी की रस्में पूरी हुईं और लोगों की नजर 'नाश्ते के स्टॉल' पर पड़ी, वहां सुनामी आ गई। वहां प्लेटों में चाऊमीन, आलू वड़ा, चिप्स और चाय रखी थी। भीड़ को देखकर ऐसा लगा जैसे लोग हफ़्तों से भूखे हों या फिर उन्हें लगा कि नाश्ता खत्म हो जाएगा तो दोबारा मिलेगा ही नहीं।

क्या दूल्हा, क्या बराती—सब नाश्ता लूटने में मस्त

वीडियो में दिख रहा नजारा वाकई हैरान करने वाला है:

  1. दूल्हा भी कूदा मैदान में: दावा किया जा रहा है कि अपनी ही शादी में एक दूल्हा भी खुद को रोक नहीं पाया और अपनी शेरवानी की परवाह किए बिना भीड़ में घुसकर नाश्ता लूटने लगा।
  2. चाय की छीना-झपटी: धक्का-मुक्की इतनी ज्यादा थी कि लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरे जा रहे थे। इस आपाधापी में एक मासूम बच्चे के हाथ पर गरम चाय गिर गई और वह जल गया। लेकिन अफ़सोस, वहां व्यवस्था संभालने वाला कोई जिम्मेदार अफसर नहीं दिखा।

प्लेट भरना जैसे 'वर्ल्ड कप' जीतना

लूट का आलम ये था कि जिसके हाथ में नाश्ते से भरी प्लेट आ गई, उसके चेहरे पर ऐसी खुशी थी जैसे उसने कोई जंग जीत ली हो या कोई बड़ी ट्रॉफी हासिल कर ली हो। महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे—किसी ने लिहाज नहीं किया। जो हाथ लगा, वो लेकर निकल लिए।

सोशल मीडिया पर लोग अब इस वीडियो को शेयर कर मजे ले रहे हैं। कोई कह रहा है "भाई, भूख बड़ी चीज है", तो कोई इसे प्रशासन की बदइंतजामी बता रहा है। बहरहाल, शादी हो गई, लेकिन यादें 'वड़े और चाऊमीन की लूट' की ही रह गईं।