प्रतिबंध भी नहीं लगा पाए लगाम रूस ने तेल बेचकर मार्च में कमाए $19 अरब, आईईए की रिपोर्ट ने दुनिया को चौंकाया
News India Live, Digital Desk : पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक घेराबंदी के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था तेल के दम पर तेजी से फर्राटा भर रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च के महीने में रूस की तेल से होने वाली कमाई में जबरदस्त उछाल आया है और यह लगभग दोगुनी होकर $19 बिलियन (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा उन देशों के लिए एक बड़ा झटका है जो रूस की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
प्रतिबंधों के बावजूद कैसे हुई इतनी बंपर कमाई?
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर कई तरह के प्रतिबंध और 'प्राइस कैप' लगाए थे। हालांकि, आईईए की रिपोर्ट बताती है कि रूस ने इन बाधाओं का रास्ता निकाल लिया है। रूस ने अपने तेल का रुख यूरोपीय देशों से हटाकर एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन की ओर कर दिया है। मार्च महीने में रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) की मांग में न केवल बढ़ोतरी हुई, बल्कि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में आए सुधार ने भी रूस की झोली भरने में बड़ी भूमिका निभाई है।
एशियाई बाजार बने रूस के लिए 'संजीवनी'
रूस की इस भारी-भरकम कमाई के पीछे एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस अब दुनिया के उन हिस्सों में भारी मात्रा में तेल निर्यात कर रहा है जहाँ उसे डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं या अन्य विकल्पों में भुगतान मिल रहा है। इससे रूस पर डॉलर के प्रभुत्व वाले बैंकिंग प्रतिबंधों का असर कम हो गया है। मार्च में रूस का कुल तेल निर्यात बढ़कर अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे उसकी रेवेन्यू में पिछले महीने के मुकाबले करीब 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पश्चिमी देशों की रणनीति पर उठे सवाल
आईईए (IEA) के ये आंकड़े पश्चिमी देशों की उस रणनीति पर सवालिया निशान लगा रहे हैं, जिसमें दावा किया गया था कि रूस को तेल से होने वाली आय को सीमित कर दिया गया है। रिपोर्ट से साफ है कि रूस न केवल अधिक तेल बेच रहा है, बल्कि वह उसे ऊंची कीमतों पर बेचने में भी कामयाब रहा है। रूसी ग्रेड का कच्चा तेल 'यूराल' अब अक्सर $60 के प्राइस कैप से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो यह साबित करता है कि वैश्विक बाजार में रूसी तेल की धाक अभी भी बरकरार है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल का भविष्य
रूस की इस बढ़ती आय का असर ग्लोबल मार्केट की सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की तेल सप्लाई स्थिर रहने से कीमतों में अचानक आने वाले उछाल को रोकने में मदद मिली है। हालांकि, आईईए ने चेतावनी दी है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है। फिलहाल, रूस का यह $19 बिलियन का मुनाफा यह साफ कर रहा है कि ऊर्जा की राजनीति में फिलहाल रूस का पलड़ा भारी है।