'धुरंधर ने सत्यानाश कर दिया': पुराने गानों के रीक्रिएशन पर भड़के दिग्गज गीतकार समीर अंजान, मेकर्स पर साधा सीधा निशाना
हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक गीतकार समीर अंजान ने बॉलीवुड में क्लासिक गानों के अंधाधुंध रीमेक और फिल्मों में उनके अनुचित इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म इंडस्ट्री पर जोरदार प्रहार किया है। फिल्म निर्देशक आदित्य धर की चर्चित स्पाई-एक्शन फिल्म 'धुरंधर' और इसके सीक्वल 'धुरंधर: द रिवेंज' की भारी बॉक्स ऑफिस चर्चा के बीच समीर अंजान ने इन फिल्मों में पुराने सदाबहार ट्रैक्स के साथ की गई रचनात्मक छेड़छाड़ पर गंभीर ऐतराज जताया है। दिग्गज गीतकार ने बिना लाग-लपेट के दो टूक शब्दों में कहा कि जिस तरह बिना किसी प्रासंगिकता या संदर्भ के पुराने लोकप्रिय गानों को उठाकर केवल सतही बैकग्राउंड स्कोर में तब्दील किया जा रहा है, उसने भारतीय सिनेमा की समृद्ध संगीत परंपरा का पूरी तरह 'सत्यानाश' कर दिया है।
#1 कोमल नाहटा से बातचीत में फूटा गुस्सा: 'गानों को बैकग्राउंड बनाकर संगीत की आत्मा मार दी'
वरिष्ठ ट्रेड एनालिस्ट और फिल्म समीक्षक कोमल नाहटा के साथ एक विशेष संवाद के दौरान समीर अंजान का दर्द और आक्रोश खुलकर सामने आया। उन्होंने संगीत उद्योग की वर्तमान स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में नए मूल गीतों की रचना पर मेहनत करने के बजाय फिल्म निर्माता ऐतिहासिक रूप से सफल गानों की लोकप्रियता का शॉर्टकट अपना रहे हैं। समीर ने स्पष्ट कहा कि 'धुरंधर' जैसी बड़े बजट की फिल्मों ने इस गलत चलन को बढ़ावा देकर हालात को और बदतर बना दिया है। उन्होंने कहा कि पुराने खूबसूरत गीतों को मनमाने तरीके से उठाकर हिंसक दृश्यों के बैकग्राउंड में दबा दिया गया है, जिससे गानों का मूल सौंदर्य और उनकी भावनात्मक गहराई पूरी तरह नष्ट हो गई है। गीतकार के अनुसार जब किसी गीत के बोल, उसकी धुन और उसकी लय का दृश्य से कोई तार्किक संबंध ही नहीं रहता, तो उसे संगीत नहीं बल्कि महज आवाज का शोर कहा जाना चाहिए।
#1 'गोलीबारी के बीच बजा रहे जुम्मा चुम्मा': समीर ने पूछा- 'आखिर इसमें नया गाना कहां है?'
समीर अंजान ने अपनी बात को साबित करने के लिए अपने ही लिखे एक बेहद लोकप्रिय कल्ट गाने का उदाहरण दिया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि कैसे एक फिल्म के ट्रेलर और दृश्यों में भारी गोलीबारी, खून-खराबे और एक्शन स्टंट्स के बीच अमिताभ बच्चन के ऐतिहासिक गाने 'जुम्मा चुम्मा दे दे' की धुन बजाई जा रही थी। उन्होंने कड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि जब गोलियां चल रही हों और आप पृष्ठभूमि में ऐसे मस्ती भरे रोमांटिक ट्रैक को रीक्रिएट कर रहे हों, तो उस रचना का क्या औचित्य बचता है। समीर ने तंज कसते हुए कहा कि यह इंडस्ट्री उनके पिता की तो है नहीं कि वे कानूनी या व्यक्तिगत रूप से हर निर्माता को रोक सकें, लेकिन यह आत्मघाती बर्बादी तब तक नहीं रुकेगी जब तक ये लोग रचनात्मकता के नाम पर सब कुछ बर्बाद करके शून्य पर न पहुंच जाएं।
#1 करण जौहर और आदित्य चोपड़ा जैसे बड़े बैनर्स से निराशा: 'ओरिजिनल को बर्बाद करना कला नहीं'
बॉलीवुड के बड़े प्रोडक्शन घरानों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए समीर अंजान ने कहा कि उन्हें आदित्य चोपड़ा और करण जौहर जैसे दिग्गज फिल्म निर्माताओं से सबसे ज्यादा निराशा हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि 90 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में यही बैनर्स सुरीले, मौलिक और कालजयी संगीत को बढ़ावा देने के लिए पहचाने जाते थे। आज जब बड़े बैनर ही अच्छे नए संगीत को गढ़ने के बजाय पुराने ट्रैक्स को बिना सोचे-समझे रीमिक्स और रीक्रिएट करने की होड़ में शामिल हो गए हैं, तो युवा और प्रतिभाशाली संगीतकारों की रचनात्मकता कुंद हो रही है। समीर ने साफ किया कि उन्हें गानों के सम्मानजनक रीक्रिएशन से आपत्ति नहीं है, लेकिन मूल रचना की गरिमा, उसके बोल और धुन को विकृत करके पेश करना किसी भी दृष्टि से कलात्मक स्वतंत्रता नहीं मानी जा सकती।
#1 'धुरंधर' में रीक्रिएट हुए सदाबहार नगमे: रणवीर सिंह की फिल्म के म्यूजिकल चॉइस पर बहस
उल्लेखनीय है कि रणवीर सिंह के मुख्य अभिनय वाली आदित्य धर की मेगा-एक्शन फिल्म 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' में कई ऐतिहासिक और शास्त्रीय महत्व के गानों का आधुनिक संस्करण इस्तेमाल किया गया है। इनमें कव्वाली की ऐतिहासिक धरोहर 'ना तो कारवां की तलाश है', उषा उत्थुप का मशहूर पॉप ट्रैक 'रंबा हो', कव्वाली 'ये इश्क इश्क है' और आरडी बर्मन का सदाबहार डांस नंबर 'मोनिका ओ माय डार्लिंग' जैसे दिग्गज गीत शामिल हैं। फिल्म विश्लेषकों का एक वर्ग जहां इसे नए दौर के सिनेमा का स्टाइलिश बैकग्राउंड ट्रीटमेंट मान रहा है, वहीं पुरानी पीढ़ी के गीतकारों और संगीत प्रेमियों का मानना है कि इन कालजयी रचनाओं को एक्शन सीन्स के तमाशे में बदलकर उनकी असली गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।