CJP प्रदर्शनों के बीच 'रामायण' के लक्ष्मण सुनील लहरी की युवाओं को बड़ी नसीहत

CJP प्रदर्शनों के बीच 'रामायण' के लक्ष्मण सुनील लहरी की युवाओं को बड़ी नसीहत

देश भर में चल रहे 'सीजेपी' (Citizens for Justice and Peace) आंदोलन, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों और युवा संगठनों की बढ़ती सक्रियता के बीच टीवी जगत से एक बेहद चौंकाने वाला और संजीदा बयान सामने आया है। रामानंद सागर की पौराणिक और ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' में अमर किरदार 'लक्ष्मण' की भूमिका निभाकर घर-घर में अपनी खास पहचान बनाने वाले मशहूर अभिनेता सुनील लहरी ने मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालातों को देखते हुए देश के युवाओं के लिए एक तीखी और विचारणीय नसीहत जारी की है। सुनील लहरी ने अपने सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से युवाओं को चेताया है कि आज का समय बहुत ज्यादा संवेदनशील और खराब दौर से गुजर रहा है, इसलिए जोश में आकर ऐसा कोई कदम न उठाएं जिसके लिए उन्हें अपनी पूरी जिंदगी भर पछताना पड़े। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

CJP प्रदर्शन और युवाओं की भागीदारी पर सुनील लहरी का तीखा और चिंताजनक बयान

पिछले कुछ हफ्तों से देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में मतदाता सूचियों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को लेकर सीजेपी के बैनर तले युवा और छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन आंदोलनों में युवाओं की भारी भीड़ को देखकर वरिष्ठ अभिनेता सुनील लहरी ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में कहा कि आज की युवा पीढ़ी अक्सर राजनीतिक बहकावे या तात्कालिक जोश में आकर विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा बन जाती है, लेकिन वे इसके दूरगामी परिणामों से अनजान रहते हैं। सुनील लहरी ने साफ शब्दों में कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करना, पुलिस कार्रवाई की चपेट में आना या किसी आपराधिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनना उनके उज्ज्वल भविष्य और करियर को हमेशा के लिए तबाह कर सकता है।

'जिंदगी बहुत अनमोल है, इसे राजनीतिक मोहरा बनने से बचाएं'

अपने इस संदेश में अभिनेता ने युवाओं को माता-पिता, परिवार और उनके भविष्य के सपनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि हर युवा का जीवन उनके परिवार के लिए बेहद अनमोल होता है, और किसी भी राजनीतिक एजेंडे या आंदोलन की आड़ में अपने करियर को दांव पर लगाना बुद्धिमानी नहीं है। सुनील लहरी ने तंज कसते हुए कहा कि आज के दौर में कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को साधने के लिए युवा ऊर्जा का इस्तेमाल मोहरे की तरह कर रहे हैं, लेकिन जब प्रशासनिक कार्रवाई या कानूनी शिकंजा कसता है, तो वे नेता पीछे हट जाते हैं और खामियाजा सिर्फ उस युवा और उसके परिवार को भुगतना पड़ता है। उन्होंने अपील की कि युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग देश निर्माण, शिक्षा और सकारात्मक कार्यों में करें न कि अराजकता फैलाने में।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान: मिली-जुली प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

सुनील लहरी का यह वीडियो और बयान सामने आते ही इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया। ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके इस बयान को लेकर लोगों की दो अलग-अलग धाराएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां बड़ी संख्या में समझदार नागरिकों, अभिभावकों और सरकार समर्थकों ने उनके इस बयान की सराहना करते हुए कहा कि एक सेलिब्रिटी के तौर पर उन्होंने युवाओं को सही दिशा दिखाने का सराहनीय काम किया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ छात्र संगठनों और विपक्षी समर्थकों ने नाराजगी जताई है। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज उठाना और विरोध करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, और इस तरह के बयानों से युवाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष को हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।

वैचारिक संघर्ष और युवा पीढ़ी के सामने खड़े भविष्य के बड़े सवाल

यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रतीक है कि मौजूदा समय में देश की युवा शक्ति किस कदर वैचारिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर बड़े पैमाने पर सड़क पर आंदोलन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज के प्रबुद्ध वर्ग और जाने-माने कलाकार युवाओं को संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं। सुनील लहरी की यह नसीहत इस बात की याद दिलाती है कि विरोध के अधिकार के साथ-साथ व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कानूनी दायरे का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या युवा इन चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए अपने कदम आगे बढ़ाते हैं या फिर यह सियासी और वैचारिक संघर्ष यूं ही और तेज होता रहता है।