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April 18 2026 04:48 am

भारत के पड़ोस में गहराया ऊर्जा संकट, पेट्रोल-डीजल की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने तोड़ी जनता की कमर

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी का सबसे भयावह असर अब भारत के पड़ोसी देशों पर दिखने लगा है। श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश इस समय भीषण ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़े हैं। तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल और सप्लाई चेन टूटने की वजह से इन देशों में पेट्रोल पंप सूखने लगे हैं और बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक तरफ भारत अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता से खुद को सुरक्षित रखे हुए है, वहीं पड़ोस में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।

श्रीलंका और बांग्लादेश: राशनिंग और 'फ्यूल पास' का दौर लौटा

श्रीलंका, जो अभी आर्थिक मंदी से उबर ही रहा था, एक बार फिर तेल संकट की चपेट में है। सरकार ने ईंधन बचाने के लिए साप्ताहिक छुट्टियां घोषित कर दी हैं और 'फ्यूल पास' के जरिए पेट्रोल-डीजल का वितरण किया जा रहा है। यही हाल बांग्लादेश का है, जहाँ तेल भंडार कुछ ही दिनों के बचे हैं। ढाका सहित कई बड़े शहरों में सीएनजी और एलपीजी की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिसके चलते वहां स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर चलाने और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

पाकिस्तान में रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, 330 के पार हुआ पेट्रोल

पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 332 रुपये प्रति लीटर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से पाकिस्तान की सरकार सब्सिडी देने की स्थिति में नहीं है। बिजली की भारी कटौती (Load Shedding) ने उद्योगों को ठप कर दिया है, जिससे बेरोजगारी और महंगाई का दोहरा वार जनता पर पड़ रहा है।

भारत पर असर: सावधानी के साथ कूटनीतिक सक्रियता

भारत के लिए अपने पड़ोसियों की यह स्थिति चिंता का विषय है। हालांकि, भारत ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और रूस से रियायती तेल खरीदकर फिलहाल स्थिति को संभाला हुआ है, लेकिन देश के भीतर कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और प्रीमियम ईंधन के महंगे होने से महंगाई का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी देशों में युद्ध लंबा खिंचता है, तो दक्षिण एशिया में मानवीय संकट पैदा हो सकता है, जिससे निपटने के लिए भारत को 'बड़े भाई' की भूमिका निभानी पड़ सकती है।