Elderly Habits : हम दौड़ रहे हैं, पर इन्हें क्यों नहीं मिलती थकावट? बुज़ुर्गों की ये 5 बातें आज भी उतनी ही सच्ची हैं

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News India Live, Digital Desk: Elderly Habits : हर साल 1 अक्टूबर को हम सब 'अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस' (International Day of Older Persons) मनाते हैं. यह दिन हमारे समाज के बुज़ुर्गों को सम्मान देने और उनकी अहमियत को समझने का एक बहुत ही ख़ास मौक़ा होता है. यह सिर्फ़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन्हें यह अहसास दिलाना है कि उनके अनुभव और ज़िंदगी जीने का उनका तरीक़ा कितना प्रेरणादायक है.

आज जब चारों तरफ़ सब कुछ इतनी तेज़ी से बदल रहा है, हमारे बुज़ुर्ग हमें कुछ ऐसे गुण और जीवन जीने के तरीक़े सिखाते हैं, जो कभी पुराने नहीं होते. आइए, उन्हीं 5 ख़ास बातों पर थोड़ी बात करते हैं, जो बुज़ुर्गों की पहचान हैं और हमेशा हमारे लिए सीखने योग्य रहेंगी:

  1. ज्ञान और अनुभव की खान: हमारे बड़े-बुज़ुर्ग चलते-फिरते किताबों की तरह होते हैं. उन्होंने ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव देखे होते हैं और हर अनुभव से कुछ सीखा होता है. उनकी सलाह या कहानी सिर्फ़ एक किस्सा नहीं होती, बल्कि बरसों के ज्ञान का निचोड़ होती है, जो हर समस्या का एक सीधा-साधा हल सुझा सकती है.
  2. धैर्य और संतोष: आज के भागदौड़ भरे समय में जहाँ हर कोई हर काम झट से चाहता है, बुज़ुर्ग हमें धैर्य का पाठ पढ़ाते हैं. वे हमें बताते हैं कि ज़िंदगी में हर चीज़ के लिए सही समय होता है और हर छोटी-बड़ी चीज़ में संतुष्ट रहना कितना ज़रूरी है.
  3. पारिवारिक मूल्यों का सम्मान: बुज़ुर्ग घर में जड़ की तरह होते हैं. वे परिवार को एकजुट रखते हैं, आपसी रिश्तों का महत्व समझाते हैं और हमें बताते हैं कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना कितना ज़रूरी है. उनसे ही हम संस्कृति और परंपराओं का असली मतलब समझते हैं.
  4. मितव्ययिता और सादगी: पुराने लोग अक्सर कम में भी गुज़ारा करना जानते हैं. वे हमें सिखाते हैं कि चीज़ों को सहेजकर कैसे रखें, पैसे की क़द्र कैसे करें और अनावश्यक ख़र्च से कैसे बचें. उनकी सादगी आज भी एक आदर्श है.
  5. लगातार सीखने की चाहत: यह सोचना ग़लत है कि बुज़ुर्ग कुछ सीख नहीं सकते. कई बड़े-बुज़ुर्ग आज भी नई तकनीक सीख रहे हैं, किताबें पढ़ रहे हैं और दुनिया को समझने की कोशिश करते रहते हैं. उनकी ये जिज्ञासा और जीवन भर सीखने की चाहत हमें प्रेरणा देती है कि सीखना कभी बंद नहीं होता.

सही मायनों में, ये सभी चीज़ें हमारे बुज़ुर्गों के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग हैं, और हमें उनकी क़द्र करनी चाहिए और उनसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए. उनकी बताई गई बातें और जीने का तरीक़ा कभी भी 'आउटडेटेड' नहीं हो सकता, क्योंकि वे हमें इंसानियत के असल मूल्य सिखाते हैं.