गुजरात में फर्जी डॉक्टरों पर सबसे बड़ा प्रहार: 15 दिन की मेगा ड्राइव में 38 झोलाछाप धरे गए, 35 के खिलाफ एफआईआर दर्ज
गुजरात में आम जनता के स्वास्थ्य और जान से खिलवाड़ करने वाले अनाधिकृत और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक अभियान चलाया है। राज्य भर में पिछले 15 दिनों तक चले इस सघन मेगा चेकिंग अभियान (Mega Drive) के दौरान स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमों ने 38 संदिग्ध फर्जी डॉक्टरों को रंगे हाथों पकड़ा है। जांच में अवैध क्लीनिक संचालित करने, बिना मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक दवाइयां देने और मरीजों की जान जोखिम में डालने की पुष्टि होने पर इनमें से 35 झोलाछापों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और संबंधित मेडिकल एक्ट की सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया का सख्त संदेश: मरीजों की जान से समझौता बर्दाश्त नहीं
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस राज्यव्यापी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री, पंजीकरण या अनुभव के चिकित्सा अभ्यास करना एक संगीन अपराध है। अयोग्य व्यक्तियों द्वारा गलत दवाइयां लिखने और इंजेक्शन लगाने से मरीजों के अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचता है और कई बार जान भी चली जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार दूरदराज के गांवों और कस्बों में बैठे नागरिकों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी बीमारी का इलाज झोलाछापों से कराने के बजाय सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में कराएं, जहां पूरी तरह योग्य डॉक्टर, निःशुल्क इलाज, दवाइयां और आधुनिक लैब जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
15 दिनों की मेगा ड्राइव के मुख्य आंकड़े और कानूनी कार्रवाई
| अभियान का विवरण | आधिकारिक आंकड़े व विवरण |
| अभियान की अवधि | 15 दिवसीय राज्यव्यापी विशेष जांच अभियान |
| पकड़े गए संदिग्ध फर्जी डॉक्टर | कुल 38 झोलाछाप चिकित्सक |
| दर्ज की गई कुल प्राथमिकी (FIRs) | 35 आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर |
| शामिल एजेंसियां | गुजरात स्वास्थ्य विभाग, औषधि नियंत्रण प्रशासन व स्थानीय पुलिस |
| जब्त की गई सामग्री | भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन, स्टेरॉयड और फर्जी मुहरें |
फर्जी डिग्रियां, एक्सपायर्ड दवाइयां और बिना लाइसेंस के चल रहे थे क्लीनिक
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जब चिन्हित संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। कई आरोपी साधारण 10वीं या 12वीं पास थे और खुद को एमबीबीएस या बीएएमएस बताकर क्लीनिक चला रहे थे। उनके पास से फर्जी मेडिकल बोर्ड्स, जाली लेटरहेड और डॉक्टर की मुहरें बरामद हुईं। इतना ही नहीं, गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर मरीजों को प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर और स्टेरॉयड धड़ल्ले से दिए जा रहे थे। छापे के दौरान कई क्लीनिकों से बिना लेबल वाली दवाइयां और एक्सपायर्ड इंजेक्शन भी जब्त किए गए, जिन्हें सील कर फॉरेन्सिक जांच के लिए भेजा गया है।
ग्रामीण इलाकों और इंडस्ट्रियल बेल्ट में जारी रहेगा औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल 15 दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे नियमित निगरानी प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों वाले औद्योगिक क्षेत्रों, स्लम बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में फ्लाइंग स्क्वॉड लगातार औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) करेंगे। इसके साथ ही दवा विक्रेताओं (केमिस्ट्स) को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी रजिस्टर्ड डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को थोक में दवाइयां और सिरिंज न बेचें, अन्यथा उनका मेडिकल स्टोर लाइसेंस भी तत्काल रद्द कर दिया जाएगा।