NEET रिजल्ट में भारी हेरफेर का आरोप! 520 अंक घटकर रह गए सिर्फ 85, दो अलग OMR शीट देख पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट हैरान

NEET रिजल्ट में भारी हेरफेर का आरोप! 520 अंक घटकर रह गए सिर्फ 85, दो अलग OMR शीट देख पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट हैरान

देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' (NEET-UG) एक बार फिर गंभीर विवादों और कानूनी पचड़े में घिरती नजर आ रही है। पंजाब के गुरदासपुर की एक 19 वर्षीय छात्रा के परीक्षा परिणाम में सामने आई हैरान करने वाली विसंगतियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। छात्रा का आरोप है कि उसने आधिकारिक आंसर-की और पोर्टल से डाउनलोड की गई ओएमआर शीट के मिलान पर 720 में से 520 अंक हासिल किए थे, लेकिन जब आधिकारिक परिणाम घोषित हुआ तो उसके अंक घटकर महज 85 रह गए। इतना ही नहीं, एजेंसी की ओर से छात्रा के नाम पर अलग-अलग उत्तरों वाली दो भिन्न ओएमआर शीट और अलग-अलग स्कोरकार्ड जारी किए जाने का दावा किया गया है।

मामले की असाधारण गंभीरता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार को तलब करते हुए अभ्यर्थी की मूल ओएमआर शीट और दोनों विवादित स्कोरकार्ड सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद परीक्षा संचालन एजेंसी की मूल्यांकन प्रणाली और डेटा सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

520 से 85 नंबर का हैरान करने वाला खेल: छात्रा का सनसनीखेज दावा

याचिकाकर्ता छात्रा दीक्षा देवी (निवासी जिला गुरदासपुर, पंजाब) ने अपने अधिवक्ता विक्रमजीत सिंह बाजवा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार, दीक्षा ने नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा में भाग लिया था। परीक्षा के उपरांत 13 जुलाई को जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक वेबसाइट पर अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट अपलोड की और करेक्शन विंडो खोली, तब छात्रा ने अपनी ओएमआर रिस्पॉन्स शीट डाउनलोड की।

छात्रा ने जब NTA द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की से अपनी डाउनलोड की गई ओएमआर शीट के उत्तरों का मिलान किया, तो उसका कुल स्कोर 720 में से 520 अंक बन रहा था। 520 अंकों के इस स्कोर पर छात्रा को एक अच्छे सरकारी या प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन जब 16 जुलाई को NTA ने आधिकारिक परिणाम घोषित किया, तो स्कोरकार्ड देखकर छात्रा और उसके परिवार के होश उड़ गए। परिणाम में छात्रा का कुल स्कोर 520 की जगह केवल 85 अंक दर्शाया गया था और उसे मेरिट सूची से बाहर कर दिया गया था।

दो अलग-अलग OMR शीट और बदला हुआ स्कोरकार्ड: क्या है पूरा मामला?

याचिका में लगाए गए आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। अधिवक्ता के अनुसार, परिणाम में विसंगति सामने आने के बाद 17 जुलाई को छात्रा को NTA के सिस्टम से एक दूसरी ओएमआर शीट प्राप्त हुई। इस दूसरी ओएमआर शीट में अभ्यर्थी का नाम, रोल नंबर और अन्य व्यक्तिगत विवरण तो बिल्कुल समान थे, लेकिन उसमें भरे गए गोलों (ऑप्शन मार्किंग) के उत्तर पहली शीट से पूरी तरह भिन्न थे।

दूसरी ओएमआर शीट में ऐसे उत्तर दर्ज थे जिनका मूल्यांकन करने पर कुल अंक 85 ही बनते थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक ही उम्मीदवार के नाम पर दो अलग-अलग उत्तरों वाली ओएमआर शीट का ऑनलाइन सिस्टम में मौजूद होना किसी सामान्य तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ या किसी 'बैकडोर चैनल' की मौजूदगी का संकेत देता है।

एनटीए दफ्तर के चक्कर और ईमेल का विरोधाभास

छात्रा ने मामले को लेकर तुरंत NTA के ग्रीवेंस सेल में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। याचिकाकर्ता का दावा है कि शिकायत के बाद 19 जुलाई को NTA की तरफ से आए एक ईमेल में उसका स्कोर पुनः 520 अंक दर्शाया गया और मार्कशीट में भी 520 अंक दर्ज थे। इसके बाद वह अपने परिजनों के साथ 20 जुलाई को दिल्ली स्थित NTA मुख्यालय पहुंची और पूरे मामले पर लिखित आवेदन दिया।

मुख्यालय स्तर पर बातचीत के बाद उसे परिणाम दुरुस्त होने का आश्वासन मिला, लेकिन 27 जुलाई को पोर्टल पर उसका परिणाम फिर से बदलकर 85 अंक कर दिया गया। जब छात्रा ने दोबारा संपर्क किया तो उसे कथित तौर पर वही 85 अंक वाली ओएमआर शीट दिखाकर अपात्र घोषित कर दिया गया। हर स्तर पर निराशा हाथ लगने के बाद न्याय की गुहार लेकर छात्रा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का कड़ा रुख: सीलबंद लिफाफे में मांगा मूल रिकॉर्ड

मामले की सुनवाई जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने दोनों स्कोरकार्ड और भिन्न ओएमआर शीट्स के साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया कि एजेंसी की मनमानी और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के कारण एक मेधावी छात्रा का भविष्य अंधकार में डूब गया है।

वहीं दूसरी ओर, NTA की ओर से पेश वकील अरुण गोसाईं ने दलील दी कि अभ्यर्थी के प्रतिवेदन पर पहले ही विचार कर निर्णय लिया जा चुका है और इस बाबत 27 जुलाई के ईमेल की प्रति कोर्ट के समक्ष रखी गई।

दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों में आए भारी अंतर को देखते हुए खंडपीठ ने निर्देश दिया कि NTA याचिकाकर्ता अभ्यर्थी की 'मूल ओएमआर शीट' (Original Physical OMR Sheet) तथा अब तक जारी किए गए दोनों स्कोरकार्डों को सीलबंद लिफाफे में सीधे अदालत के समक्ष पेश करे। मूल भौतिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह वैज्ञानिक और न्यायिक रूप से स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा ने परीक्षा केंद्र पर वास्तव में क्या उत्तर मार्क किए थे और सिस्टम में अपलोडिंग के दौरान कहां चूक हुई।

याचिकाकर्ता की मांग: प्रोविजनल काउंसलिंग और निष्पक्ष जांच की गुहार

छात्रा ने अदालत से प्रार्थना की है कि जब तक इस विसंगति का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उसे 520 अंकों के आधार पर मेडिकल प्रवेश काउंसलिंग में अंतरिम (Provisional) रूप से शामिल होने की अनुमति दी जाए, ताकि काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त होने की स्थिति में उसका एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।

इसके साथ ही याचिका में यह भी मांग की गई है कि एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग ओएमआर शीट कैसे जेनरेट हुईं, इसकी गहन तकनीकी और आपराधिक जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों व तकनीकी सेवा प्रदाताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

नीट मूल्यांकन प्रणाली पर उठते सवाल और छात्रों की चिंता

नीट परीक्षा को लेकर पहले से ही पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स के विवादों के बीच इस तरह का ओएमआर विवाद सामने आना परीक्षा की विश्वसनीयता पर गहरा आघात है। देश भर के लाखों छात्र वर्षों तक कोचिंग और कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना संजोते हैं। ऐसे में यदि डिजिटल ओएमआर अपलोडिंग और स्कोरकार्ड जनरेशन की प्रक्रिया में इतनी बड़ी खामियां सामने आती हैं, तो यह सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और योग्यता प्रणाली पर चोट करती है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा मूल रिकॉर्ड तलब किए जाने से अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का यह कदम न केवल पीड़ित छात्रा को न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि भविष्य में ओएमआर स्कैनिंग, बारकोड ट्रैकिंग और स्कोरकार्ड पब्लिकेशन की पूरी प्रक्रिया में अभेद्य पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश तय कर सकता है।

Latest Posts