Education in India : शिक्षा के क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग, साक्षरता दर 80.9% पर पहुंची, 5 राज्यों ने रचा इतिहास

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News India Live, Digital Desk: Education in India : शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. देश की साक्षरता दर (Literacy Rate) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 के अवसर पर यह खुशखबरी साझा करते हुए बताया कि भारत की साक्षरता दर 2011 के 74% से बढ़कर अब 80.9% हो गई है. यह आंकड़ा देश में शिक्षा के प्रसार और सरकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है.

पांच राज्यों ने हासिल किया 100% साक्षरता का लक्ष्य

इस सफलता की कहानी में सबसे चमकदार अध्याय पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लिखा है, जिन्होंने पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता (full functional literacy) का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इस प्रतिष्ठित सूची में लद्दाख, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं. शिक्षा मंत्री ने इन राज्यों की सराहना करते हुए इसे सरकार, समाज और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयास की शक्ति का प्रमाण बताया. विशेषकर हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य का इस सूची में शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है.

कैसे आया यह बदलाव?

साक्षरता दर में इस शानदार उछाल के पीछे सरकार के 'उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' (ULLAS-Nav Bharat Saaksharta Karyakram) जैसी पहलों का बड़ा योगदान है. इस कार्यक्रम के तहत अब तक 3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों और 42 लाख स्वयंसेवकों ने अपना पंजीकरण कराया है. यह कार्यक्रम सिर्फ पढ़ना-लिखना सिखाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सशक्त, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर देता है.

चुनौतियां अभी बाकी

भले ही भारत ने 80.9% का आंकड़ा छू लिया हो, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं. पुरुषों (87.2%) और महिलाओं (74.6%) के बीच साक्षरता का अंतर अभी भी एक बड़ी बाधा है.इसी तरह, शहरी (88.9%) और ग्रामीण (77.5%) क्षेत्रों के बीच भी एक बड़ा फासला है, जिसे पाटने की जरूरत है.बिहार (74.3%), मध्य प्रदेश (75.2%) और राजस्थान (75.8%) जैसे राज्य अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं, जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

यह सफलता एक मील का पत्थर है, लेकिन अंतिम मंजिल नहीं. जब तक देश का हर नागरिक साक्षर नहीं हो जाता, तब तक यह सफर जारी रहेगा. यह जीत इस बात की उम्मीद जगाती है कि सामूहिक प्रयास से भारत बहुत जल्द 100% साक्षरता के अपने सपने को साकार कर सकता है.