Eating Disorders : पतला होने का ये तरीका कहीं आपको बीमार न कर दे? जानिए किन लोगों के लिए जहर है इंटरमिटेंट फास्टिंग

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News India Live, Digital Desk:  Eating Disorders : आजकल हर तरफ वजन कम करने के लिए 'इंटरमिटेंट फास्टING' का ट्रेंड चल रहा है. सेलिब्रिटीज से लेकर आम लोगों तक, हर कोई इसे अपना रहा है. यह एक ऐसा डाइट प्लान है जिसमें खाने से ज्यादा जोर इस बात पर होता है कि 'कब नहीं खाना है'. इसमें लंबे समय तक भूखा रहना होता है और फिर एक निश्चित समय में ही अपना भोजन पूरा करना होता है. सुनने में यह जितना आकर्षक लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है, खासकर कुछ लोगों के लिए.

यह समझना बहुत जरूरी है कि जो चीज एक के लिए अमृत है, वो दूसरे के लिए जहर भी हो सकती है. इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए नहीं बनी है. आइए जानते हैं कि किन लोगों को यह डाइट प्लान आजमाने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए.

क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग?

यह असल में कोई डाइट नहीं, बल्कि खाने का एक पैटर्न है. इसमें आप दिन के कुछ घंटे उपवास (fasting) करते हैं और बचे हुए कुछ घंटों में ही खाते हैं (feeding window). इसके कई तरीके हैं, लेकिन सबसे पॉपुलर 16:8 मेथड है, जिसमें व्यक्ति 16 घंटे भूखा रहता है और दिन के 8 घंटे की विंडो में ही अपनी मील्स लेता है. उदाहरण के लिए, आप अपना सारा खाना दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे के बीच खाते हैं और बाकी समय कुछ नहीं खाते.

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अगर आप नीचे बताई गई किसी भी कैटेगरी में आते हैं, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके लिए फायदे से ज्यादा नुकसान कर सकती है.

1. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं (Pregnant and Breastfeeding Women):
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान एक महिला को सामान्य से कहीं ज्यादा पोषण और कैलोरी की जरूरत होती है. इस समय लंबे समय तक भूखा रहना न सिर्फ मां के शरीर को कमजोर कर सकता है, बल्कि बच्चे के विकास पर भी बहुत बुरा असर डाल सकता है.

2. डायबिटीज के मरीज (Diabetics):
डायबिटीज के मरीजों के लिए अपने ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. लंबे समय तक भूखा रहने से उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक रूप से गिर सकता है (हाइपोग्लाइसीमिया), जो जानलेवा भी हो सकता है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस तरह का कोई भी डाइट प्लान न अपनाएं.

3. कम वजन वाले लोग (Underweight Individuals):
अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) पहले से ही 18.5 से कम है, तो आप अंडरवेट की कैटेगरी में आते हैं. ऐसे में कैलोरी को और सीमित करना या लंबे समय तक भूखा रहना आपके शरीर को जरूरी पोषक तत्वों से वंचित कर सकता है, जिससे आपकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और आप गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं.

4. बुजुर्ग (Elderly People):
बढ़ती उम्र के साथ शरीर कमजोर हो जाता है और मांसपेशियों का क्षरण (muscle loss) तेजी से होता है. बुजुर्गों को अपनी सेहत बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की जरूरत होती है. इंटरमिटेंट फास्टिंग उनकी इस जरूरत को पूरा नहीं कर पाती और उन्हें और कमजोर बना सकती है.

5. जिन्हें ईटिंग डिसऑर्डर रहा हो (History of Eating Disorders):
जिन लोगों को एनोरेक्सिया या बुलिमिया जैसी खाने से जुड़ी कोई बीमारी रही है, उनके लिए इस तरह का प्रतिबंधात्मक डाइट पैटर्न फिर से उस बीमारी को ट्रिगर कर सकता है. यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है.

वजन कम करना जरूरी है, लेकिन अपनी सेहत की कीमत पर नहीं. कोई भी नया डाइट ट्रेंड अपनाने से पहले हमेशा किसी डॉक्टर या सर्टिफाइड डायटीशियन से सलाह जरूर लें, क्योंकि वही आपके शरीर की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं.