अपनी खुशी हर किसी को न बताएं, वरना नजर लगते देर नहीं लगेगी: चाणक्य नीति

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जीवन में जब हमें कोई बड़ी सफलता मिलती है या कोई खुशबरी आती है, तो हमारा मन करता है कि हम इसे पूरी दुनिया को बता दें। लेकिन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यहीं पर हमें अपनी भावनाओं पर थोड़ा काबू रखना चाहिए। हमारे आसपास कई ऐसे लोग होते हैं जो ऊपर से तो हमारे हमदर्द बनते हैं, लेकिन हमारी तरक्की देखकर उनके कलेजे पर सांप लोटने लगते हैं।

चाणक्य नीति के अनुसार, अगर आप सुकून भरी जिंदगी चाहते हैं, तो अपनी खुशियों को कुछ खास किस्म के लोगों से हमेशा गुप्त रखना चाहिए।

1. हर किसी को अपना न समझें (दिखावटी लोग)
चाणक्य कहते हैं कि हर हाथ मिलाने वाला दोस्त नहीं होता। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो आपकी सफलता सुनकर मुंह पर तो 'बधाई हो' कहेंगे, लेकिन मन ही मन यह सोचेंगे कि "यह सफलता मुझे क्यों नहीं मिली, इसे क्यों मिली?" यह तुलना (Comparison) धीरे-धीरे जलन का रूप ले लेती है और जो पॉजिटिविटी आपके रिश्ते में होनी चाहिए थी, वो नफरत में बदल जाती है। इसलिए, अपनी उपलब्धि का जश्न सिर्फ उनके साथ मनाएं जो सच में आपके अपने हैं।

2. स्वभाव से जलने वाले लोग (ईर्ष्यालु)
समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका स्वभाव ही 'जलना' होता है। उन्हें इस बात से मतलब नहीं कि आपने कितनी मेहनत की है। जैसे ही आप उन्हें अपनी खुशी बताएंगे, वे उसे छोटा दिखाने की कोशिश करेंगे। वे कहेंगे, "अरे, यह तो तुक्का था" या "इसमें कौन सी बड़ी बात है"। ऐसे लोग आपकी खुशी को कम करने और आपका आत्मविश्वास तोड़ने की पूरी कोशिश करते हैं। ऐसे निगेटिव लोगों से अपनी जीत की बात छिपाकर रखना ही बेहतर है।

3. जिनसे पहले से अनबन हो
यह बहुत ही प्रैक्टिकल सलाह है। अगर किसी व्यक्ति के साथ आपके रिश्ते पहले से खराब हैं या खटास चल रही है, तो उनके सामने अपनी खुशी का इज़हार करना 'आ बैल मुझे मार' जैसा है। आपकी खुशी देखकर वे असहज महसूस करेंगे और उनकी यह बेचैनी आपके प्रति और ज्यादा कड़वाहट पैदा करेगी। वे इसे एक चुनौती की तरह ले सकते हैं और आपके रास्ते में रोड़े अटकाने की कोशिश कर सकते हैं।

4. जो भरोसे के लायक न हों
चाणक्य सबसे ज्यादा सावधान उन लोगों से रहने को कहते हैं, जिनका पेट हल्का होता है या जो भरोसेमंद नहीं होते। अगर आपने ऐसे व्यक्ति को अपनी कोई खुशखबरी या फ्यूचर प्लान बता दिया, तो वे उस जानकारी का इस्तेमाल आपके ही खिलाफ कर सकते हैं। वे आपकी बातों को तोड़-मरोड़ कर दूसरों के सामने पेश कर सकते हैं, जिससे आपकी छवि खराब हो सकती है और बेवजह का तनाव पैदा हो सकता है।

निष्कर्ष
याद रखिए, खुशी बांटने से बढ़ती जरूर है, लेकिन सही इंसान के साथ। गलत इंसान के साथ बांटी गई खुशी नजर और ईर्ष्या का कारण बन सकती है। इसलिए अगली बार जब कुछ अच्छा हो, तो उसे सिर्फ अपने तक या अपने सबसे करीबी लोगों तक ही सीमित रखें।