बीएचयू में पीएचडी करना हुआ प्राइवेट कॉलेज जितना महंगा, जानिए अब कितने पैसे चुकाने होंगे

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News India Live, Digital Desk: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू (BHU) का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? एक ऐसी जगह जहां संस्कार हैं, शानदार शिक्षा है और सबसे बड़ी बात यह आम से आम छात्र की पहुंच में है। यानी "सस्ती और अच्छी पढ़ाई"। लेकिन, अब ऐसा लगता है कि 'सस्ती' वाली बात शायद बीते ज़माने की कहानी होने जा रही है।

ताज़ा खबर ने उन तमाम नौजवानों को गहरा सदमा दिया है जो अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' लगाने का सपना लेकर बीएचयू में पीएचडी करने आ रहे थे। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीएचडी (PhD) कोर्सेज की फीस में एक-दो हजार नहीं, बल्कि सीधे तीन गुना तक का इजाफा कर दिया है।

आखिर कितनी बढ़ी है फीस?

मामला शैक्षणिक सत्र 2024-25 का है। जो छात्र इस नए सत्र में दाखिला लेंगे, उन्हें इस बढ़ी हुई फीस का सामना करना पड़ेगा।

अगर इसे आसान भाषा में समझें तो फीस का यह गणित सबके होश उड़ा रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो कुछ कोर्सेज और कैटेगरी में फीस जो पहले बहुत मामूली हुआ करती थी, अब उसे कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले एक आम रिसर्च स्कॉलर जो फीस आसानी से भर देता था, अब उसे एडमिशन के वक्त हज़ारों रुपये का इंतजाम करना होगा। इसमें कोर्स फीस के साथ-साथ अन्य मदों में भी बढ़ोतरी की चर्चा है।

यह बदलाव सिर्फ़ रेगुलर सीटों पर नहीं, बल्कि पेड (Paid) सीटों और पार्ट-टाइम पीएचडी वालों पर और भी ज्यादा भारी पड़ने वाला है।

क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

अक्सर जब फीस बढ़ती है, तो तर्क दिया जाता है कि लैब का खर्चा बढ़ गया है, सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, या फिर महंगाई बढ़ गई है। प्रशासन की अपनी दलीलें हो सकती हैं कि वे यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर को वर्ल्ड क्लास बनाना चाहते हैं, जिसके लिए फंड की ज़रूरत है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इसका बोझ सिर्फ़ छात्रों की जेब पर डालना सही है?

एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी (केंद्रीय विश्वविद्यालय) होने के नाते बीएचयू की जिम्मेदारी है कि वहां समाज के हर तबके का बच्चा पहुँच सके। लेकिन तीन गुना फीस बढ़ने से ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए रिसर्च की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी।

छात्रों में भारी नाराजगी

जाहिर है, इस खबर के बाद कैंपस में सुगबुगाहट तेज़ है। छात्रों का कहना है कि यह फैसला उन स्कॉलर्स के साथ नाइंसाफी है जो फेलोशिप या घर के पैसों पर निर्भर रहते हैं। अगर सरकारी संस्थान भी कॉर्पोरेट स्टाइल में फीस वसूलने लगेंगे, तो फिर प्राइवेट और सरकारी में फर्क क्या रह जाएगा?

फिलहाल, नए छात्रों के लिए सलाह यही है कि अगर आप बीएचयू में पीएचडी का मन बना रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले नया फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) ध्यान से ज़रूर देख लें, ताकि बाद में झटका न लगे।