पैरेंट्स के लिए बड़ी खुशखबरी, अब एडमिशन से पहले ही पता चल जाएगा स्कूल का काला-चिट्ठा, सीबीएसई का हंटर चला

Post

News India Live, Digital Desk : अगर आप भी एक पैरेंट (Parent) हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर सुकून वाली मुस्कान ले आएगी। अक्सर जब हम अपने बच्चे का एडमिशन कराने किसी बड़े प्राइवेट स्कूल में जाते हैं, तो हमें दिखाई जाती है चमकदार बिल्डिंग, एसी क्लासरूम और बड़े-बड़े वादे। लेकिन क्या हमें कभी यह बताया जाता है कि जो टीचर हमारे बच्चे को फिजिक्स या मैथ पढ़ाने वाला है, उसके पास खुद कितनी योग्यता (Qualification) है? क्या स्कूल आपसे फीस के नाम पर जो मोटी रकम ले रहा है, उसका सही इस्तेमाल हो भी रहा है?

इन सवालों के जवाब अक्सर गोलमोल कर दिए जाते थे। लेकिन अब CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने साफ कह दिया है अब और नहीं चलेगा।"

सीबीएसई ने अपने सभी स्कूलों के लिए एक सख्त आदेश जारी किया है, जिसके मुताबिक अब स्कूलों को 'पारदर्शिता' (Transparency) बरतनी ही होगी। कोई भी जानकारी अब गुप्त नहीं रहेगी।

क्या है नया आदेश?

सीबीएसई ने सभी एफिलिएटेड (Affiliated) स्कूलों से कहा है कि उन्हें अपनी वेबसाइट पर 'Mandatory Public Disclosure' यानी अनिवार्य सार्वजनिक जानकारी का एक सेक्शन बनाना होगा। इसमें सिर्फ रस्मी जानकारी नहीं, बल्कि स्कूल की कुंडली डालनी होगी।

बोर्ड का कहना है कि स्कूल अपनी वेबसाइट के होमपेज पर एक लिंक दें, जहां क्लिक करते ही पैरेंट्स को स्कूल का पूरा ब्योरा मिल जाए। और यह सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि एक आदेश है।

टीचर्स की पोल-पट्टी भी आएगी सामने

इस आदेश की सबसे बड़ी बात जो पैरेंट्स के हक में है, वह है शिक्षकों की योग्यता। कई बार स्कूल पैसे बचाने के लिए कम क्वालिफाइड टीचर्स को रख लेते हैं और फीस पूरी वसूलते हैं। अब स्कूलों को वेबसाइट पर अपने हर एक टीचर का नाम, उनकी शैक्षणिक योग्यता (Degree/Qualification) और अनुभव साफ़-साफ़ लिखना होगा।

ताकि आप यह चेक कर सकें कि जो टीचर आपके बच्चे को साइंस पढ़ा रहा है, उसके पास साइंस की सही डिग्री है भी या नहीं। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता (Quality Education) को सुधारने में बहुत बड़ा बदलाव लाएगा।

फीस और सुविधाओं का भी देना होगा हिसाब

सिर्फ टीचर्स ही नहीं, स्कूलों को अब यह भी सार्वजनिक करना होगा कि:

  • वे फीस के तौर पर कुल कितना पैसा लेते हैं (फीस स्ट्रक्चर)।
  • उनके पास इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है (सच में लैब और लाइब्रेरी है या नहीं)।
  • स्कूल में सुरक्षा (Safety) के क्या इंतजाम हैं।
  • पानी और साफ-सफाई के सर्टिफिकेट हैं या नहीं।

पैरेंट्स को अब भटकना नहीं पड़ेगा

पहले छोटी-छोटी जानकारी के लिए पैरेंट्स को स्कूल के रिसेप्शन के चक्कर काटने पड़ते थे और वहां भी कई बार सही जवाब नहीं मिलता था। अब आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं। बस स्कूल की वेबसाइट खोलिए और सब कुछ देख लीजिए। सीबीएसई का मानना है कि इससे न सिर्फ़ भ्रष्टाचार कम होगा, बल्कि पैरेंट्स एक सही और सूचित फैसला (Informed Decision) ले पाएंगे।

तो अगली बार जब स्कूल जाएं, तो उनसे सीधे पूछिए "आपकी वेबसाइट पर डिटेल्स अपडेटेड हैं न?" क्योंकि अब यह आपका हक़ है।