सोमवार को भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 5 चीजें, भयंकर क्रोधित हो सकते हैं भोलेनाथ, जानें क्या है सही नियम
News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष आराधना के लिए समर्पित है। देवों के देव महादेव अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से चढ़ाया गया सिर्फ एक लोटा जल भी भोलेनाथ को खुश करने के लिए काफी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव पुराण और अन्य धार्मिक शास्त्रों में भगवान शिव की पूजा के कुछ बहुत सख्त नियम भी बताए गए हैं? अगर आप सोमवार के दिन शिव जी की पूजा करते हैं, तो आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें कुछ चीजें भूलकर भी अर्पित नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं वो कौन सी चीजें हैं, जिन्हें चढ़ाने से शिव जी रुष्ट हो सकते हैं।
शिव पूजा में वर्जित है तुलसी का पत्ता
सनातन धर्म में तुलसी (Tulsi) को बहुत ही पवित्र माना जाता है और भगवान विष्णु समेत कई देवी-देवताओं की पूजा में इसका इस्तेमाल अनिवार्य है। लेकिन भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग पूरी तरह से निषेध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने अत्याचारी राक्षस जलंधर का वध किया था, तब उसकी पत्नी वृंदा ने क्रोधित होकर शिव जी को श्राप दिया था कि उनकी पूजा में कभी भी तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसीलिए शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाने की मनाही है।
भूलकर भी न चढ़ाएं सिंदूर, कुमकुम और रोली
हिंदू धर्म में सिंदूर, रोली और कुमकुम को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और मुख्य रूप से देवियों की पूजा में इनका इस्तेमाल होता है। वहीं, शास्त्र बताते हैं कि शिवलिंग (Shivling) पुरुष तत्व और वैराग्य का प्रतीक है। इसलिए शिव जी को सिंदूर या कुमकुम चढ़ाना वर्जित माना गया है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए हमेशा सफेद चंदन या भस्म ही अर्पित करनी चाहिए।
नारियल का पानी चढ़ाने से बचें
अक्सर लोग शिव जी की पूजा में साबुत नारियल चढ़ाते हैं, जो कि शुभ है। लेकिन शिवलिंग पर नारियल का पानी (Coconut Water) चढ़ाना शास्त्रों में निषेध बताया गया है। नारियल को 'श्रीफल' कहा जाता है, जो साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। नियम यह है कि शिव जी पर चढ़ाई गई चीजों को प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं किया जाता, इसलिए शिवलिंग पर नारियल का पानी भी अर्पित नहीं किया जाता।
खंडित (टूटे हुए) चावल चढ़ाना है अशुभ
भगवान शिव को चावल यानी 'अक्षत' बहुत प्रिय है। लेकिन इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला चावल बिल्कुल भी टूटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए। भगवान शिव को पूर्णता और अनंत का प्रतीक माना गया है, इसलिए उन्हें हमेशा पूर्ण (साबुत) अक्षत ही चढ़ाया जाता है। खंडित अक्षत चढ़ाने से पूजा का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।
केतकी के फूल से शिव होते हैं नाराज
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया था। तब वहां एक विशाल ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। ब्रह्मा जी ने उस ज्योतिर्लिंग का अंतिम छोर देख लेने का झूठा दावा किया और इस झूठ में केतकी के फूल (Ketaki Flower) ने उनका साथ दिया। इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने केतकी को श्राप दे दिया कि उनकी पूजा में कभी भी केतकी के फूल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।