भूलकर भी मत देखना गणेश चतुर्थी का चांद, वरना लग सकता है झूठा कलंक! जानिए पूरी कहानी
गणेश चतुर्थी का त्योहार ढेरों खुशियाँ और रौनक लेकर आता है। हर तरफ 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजते हैं। लेकिन इस एक दिन, उत्सव के साथ-साथ एक सावधानी भी बरतनी होती है। एक ऐसी परंपरा है जिसके अनुसार इस दिन चांद के दर्शन करना मना होता है।
बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि गणेश चतुर्थी की रात को चांद की तरफ नहीं देखना चाहिए, वरना देखने वाले पर झूठा कलंक या आरोप लग सकता है। इसीलिए इसे 'कलंक चतुर्थी' भी कहा जाता है। लेकिन आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? इसके पीछे छिपी है एक बहुत ही दिलचस्प कहानी।
जब गणेश जी ने चंद्रमा को दिया था श्राप
कहा जाता है कि एक बार गणेश जी अपने एक भक्त के घर से पेट भरकर मोदक खाकर रात में अपने वाहन, मूषक (चूहे) पर बैठकर लौट रहे थे। रास्ते में एक सांप को देखकर उनका चूहा डर गया और उछल पड़ा, जिससे गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़े।
गिरने की वजह से उनका पेट फट गया और सारे मोदक जमीन पर बिखर गए। गणेश जी उठे और सारे लड्डू वापस अपने पेट में रखने लगे। यह पूरी घटना आसमान में बैठे चंद्र देव देख रहे थे। गणेश जी की यह हालत देखकर वह अपनी हंसी नहीं रोक पाए और जोर-जोर से हंसने लगे।
अपनी शक्ल का मज़ाक बनता देख गणेश जी को बहुत गुस्सा आ गया। उन्होंने चंद्र देव से कहा, "तुम्हें अपने रूप और सुंदरता पर बहुत घमंड है न? मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि आज से तुम्हें कोई नहीं देखेगा। और जो कोई भी आज की तारीख (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) पर तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा और उसे कलंक का सामना करना पड़ेगा।"
श्राप मिलते ही चंद्र देव की सारी खूबसूरती चली गई और वह घबरा गए। उन्होंने अपनी भूल के लिए गणेश जी से बहुत माफी मांगी। तब बाकी देवताओं की विनती पर गणेश जी का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और उन्होंने कहा कि वह श्राप वापस तो नहीं ले सकते, लेकिन इसका असर कम कर सकते हैं। तब से यह मान्यता है कि इस एक दिन जो भी चांद को देखता है, उसे दोष का सामना करना पड़ता है।
अगर गलती से चांद देख लिया तो क्या करें?
कहा जाता है कि अगर आपसे गलती से चांद दिख जाए, तो इस दोष से बचने के लिए भगवान कृष्ण की 'स्यमंतक मणि' की कहानी सुननी या पढ़नी चाहिए।