Diabetes Reversal: क्या बिना दवा के कंट्रोल हो सकती है शुगर? एक्सपर्ट्स का दावा ,ये 5 आसन कर सकते हैं चमत्कार
News India Live, Digital Desk: आजकल डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी (Diabetes) घर-घर की कहानी बन गई है। सुबह उठते ही सबसे पहले शुगर की गोली खाना और दिन भर मीठे से परहेज करना—कई लोगों की जिंदगी बस इसी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। लेकिन क्या आपको पता है कि अगर सही लाइफस्टाइल अपनाई जाए, तो इस बीमारी को न सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है, बल्कि काफी हद तक रिवर्स (Reverse) भी किया जा सकता है?
जी हाँ, अब सिर्फ योग गुरु ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े डॉक्टर्स भी यह मान रहे हैं कि कुछ विशेष योगासन (Yoga Asanas) डायबिटीज मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये आसन सीधे आपके पैंक्रियास (Pancreas) को एक्टिव करते हैं, जिससे नेचुरल तरीके से इंसुलिन बनने में मदद मिलती है।
आइए जानते हैं उन 5 खास योगासनों के बारे में जिन्हें डॉक्टर्स ने भी 'ग्रीन सिग्नल' दिया है:
1. मंडूकासन (Mandukasana)
इसे 'फ्रॉग पोज' भी कहते हैं। शुगर के मरीजों के लिए यह सबसे असरदार माना जाता है। जब आप मुट्ठी बंद करके पेट को दबाते हैं, तो इससे पैंक्रियास की मालिश होती है और वह सक्रिय होता है। यह पेट की चर्बी कम करने में भी मददगार है।
2. कपालभाति (Kapalbhati)
हालांकि यह एक प्राणायाम है, लेकिन डॉक्टर्स इसे डायबिटीज के लिए बहुत जरूरी मानते हैं। सांस छोड़ने की यह प्रक्रिया शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे शुगर लेवल बैलेंस रहता है।
3. वक्रासन (Vakrasana)
इसे करने से रीढ़ की हड्डी में तो लचक आती ही है, साथ ही पेट के अंगों पर खिंचाव पड़ता है। यह लिवर और पैंक्रियास की कार्यक्षमता को सुधारने में बहुत बेहतरीन है।
4. पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
यह आगे झुककर किया जाने वाला आसान है। यह न केवल ब्लड शुगर को कम करता है बल्कि तनाव (Stress) और हाई बीपी—जो डायबिटीज के पक्के दोस्त हैं—उन्हें भी दूर भगाता है।
5. भुजंगासन (Bhujangasana)
इसे कोबरा पोज़ कहते हैं। यह आपके फेफड़ों और पेट के लिए बहुत अच्छा है। इसे नियमित रूप से करने से पाचन तंत्र सुधरता है और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर धीरे-धीरे नीचे आने लगता है।
डॉक्टर की सलाह: संयम जरूरी है
दोस्तों, याद रखिए कि योग कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आज किया और कल बीमारी खत्म। इसे अपनी दिनचर्या (Routine) का हिस्सा बनाना होगा। अगर आप इसे रोज सुबह खाली पेट करते हैं और साथ में अच्छी डाइट लेते हैं, तो कुछ ही महीनों में आपको अपनी रिपोर्ट्स में फर्क दिखने लगेगा।
शुरुआत धीरे करें, अपनी क्षमता के अनुसार करें और डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवाओं में कोई बदलाव करें। सेहत आपकी है, जिम्मेदारी भी आपकी ही होनी चाहिए!